भाई - बहन आपस में शादी कर इस पवित्र रिश्ते को शर्मशार किया
- by Admin (News)
- Mar 30, 2021
सगे चचेरे भाई - बहन ने स्वयं को बिवाह सूत्र में बांधकर राखी के रिश्ते पर प्रश्नवाचक चिन्ह खड़ा कर दिया| जिस कलाई पर राखी जैसा पवित्र धागा बांधा जाता हो वो हाथ मांग में सिंदूर नहीं भर सकता | यह वसूल प्रथा भारत के कई राज्य में जिन्दा है |
यह घटना झारखण्ड राज्य की है जहाँ रिश्ते में दूर के भाई बहन बिवाह सबंध के विषय में सोंच भी नहीं सकते और बिवाह करना तो दूर की बात रही | परिवार के सदस्यों ने इस रिश्ते का जमकर विरोध किया है और अपने समाज में "मेरी बेटी मर गई मेरे लिए" सन्देश छोड़ा और बीते शनिवार को उनके विरोध का हद पार हो गया जब लड़की का पुतला बनाकर उसकी शवयात्रा निकली गई और राम नाम सत्य है का नारा लगाते हुए उसे शमशान घाट भी ले जाया गया और वहां रीति रिवाज से अंतिम संस्कार भी किया गया |
लड़की की माँ ने कहा :- बेटी की हरकत ने समाज में मेरी साख को नुकसान पहुंचाया है , मर गई वो मेरे लिए |
उत्तर भारत राज्य में अगर जुबान से भाई संबोधित कर दिया गया हो तो भाई का मतलब भाई होता है वो साईं नहीं बन सकता और ऐसे में अगर वहां नया इतिहास रचा जाये तो सिर्फ एक कहानी नहीं बनती बल्कि विरोधाभाष में कदम बढ़ाया जाता है और वहां बेटे बेटियों की खैर नहीं और अंजाम आप देख रहे है | खैर ......
इन दिनों भाई बहन में बिवाह होना व्यापक रूप लेता नजर आ रहा है | अभी हाल हीं में फुफेरे भाई से एक बहन ने शादी कर ली थी | आखिर क्यूँ तोड़ना चाहते है ये नए युवा वर्ग , पवित्र धागे के बंधन को और वहीं इस धागे को मंगलसूत्र में बांधकर समाज में एक नया इतिहास लिखना चाहते है , क्या यह संभव है ? कहना बहुत मुश्किल है लेकिन ! यह सत्य है की आरंभिक दौड़ में किसी भी नियम का उलंघन और प्रथा तोड़ना बड़ा हीं कठिन होता है मगर एक दूसरे को देख देख के यह प्रथा या नियम का बंधन ढीला पड़कर स्वतः खुल जाता है और फिर ! सभी एक दूसरे का अनुकरण आरंभ कर देते है | जैसे विधवा बिवाह या सतीप्रथा आदि या उससे भी पीछे का इतिहास पलटा जाए तो महिलाओं को कलम पकड़ने की आजादी नहीं थी | रामेश्वरी नामक एक लड़की ने भाई का देखा देखी कलम पकड़ लिया था और छुपकर लिखना पढना सिखा , किसी की नजर पड़ी तो यह बातें आग की तरह फ़ैल गई तो उस लड़की की ऊँगली हीं काट दी गई , न ऊँगली रहेगा न कलम पकड़ पायेगी |तो लड़कियों को कलम पकड़ने की ऐसी सजा मिली जिसमे उस वक्त कई कदम ठहर गए होंगे और सक्षम होकर भी ऊंचाई पर पहुँचने की तमन्ना दब गई होगी |
आज के दौड़ में बेटियां प्लेन भी उड़ा रही हैं और देश भी चला रही है और पुरानी प्रथा धूमिल हो गई | हम ये नहीं कहते की रीति - रिवाज गलत बनाया गया है | आजादी अच्छी चीज है और बंधन गलत मगर ! बच्चों में प्रेम उत्पन्न हुआ तभी ऐसी घटना पैदा हुई और झारखण्ड के चतरा जिले में टंडवा प्रखंड की धनगड़ा पंचायत में लोगों ने इस रिश्ते का जमकर विरोध किया है |
पुतला बना कर लड़की की अर्थी तो निकाली गई मगर ! लड़का का क्या हुआ ? प्रकाश डालना जरुरी है तो ऐसा महसूस किया जा रहा है की लड़के वाले के पक्ष से शायद ! उतना विरोध नहीं हुआ हो , नहीं तो उनके विरोध की बातें भी छनकर सामने आ हीं जाती | ...... ( न्यूज़ :- भव्याश्री डेस्क )

रिपोर्टर
Admin (News)