कुवैत ने योग फेस्टिवल पर जैसे हीं बैन लगाया , महिला उतरी सड़क पर | संसद के सामने प्रदर्शन जारी रहेगा - Bhavyashri News
- by Admin (News)
- Feb 22, 2022
कुवैत सरकार ने जैसे हीं योग फेस्टिवल पर बैन लगाया तो विरोध में महिलायें सड़क पर उतर पड़ी और कट्टरता के खिलाफ महिला मोर्चा निकाल संसद के सामने प्रदर्शन किया | जहाँ योग सिखाने वाली संस्था ने रेगिस्तान में "योग रिट्रीट" के आयोजन का विज्ञापन दिया था |
विज्ञापन जैसे हीं छपा धीरे धीरे विवाद बढ़ता गया | इस विज्ञापन से कट्टरपंथी नेता भड़क गए जिससे विवाद बढ़ता गया और कुवैत सरकार ने इस आयोजन पर हीं बैन लगा दिया |
सरकार का कहना है कि - योग बाहरी है | यह कुवैती समाज में कभी भी मान्य नहीं था , इसलिए हमें खुले में योग करने पर बैन जारी रखना होगा |
कुवैत सरकार से आगे बढ़ने वाली महिलाओं ने स्वतंत्रता दिए जाने और प्रतिबन्ध हटाने पर यह प्रदर्शन किया है , जहाँ लम्बे समय से महिलायें संघर्षरत रही हैं |
मुद्दा यह भी है कि - चरित्र शंका पर पत्नी की हत्या करने के बाद सजा की अवधि 3 साल क्यूँ ?
अगर कोई व्यक्ति अपनी पत्नी को किसी दूसरे पुरुष के साथ सम्बन्ध बनाने के शक पर जान से मार देता है तो उसे ज्यादा से ज्यादा सिर्फ 3 साल की सजा या सिर्फ 46 डॉलर यानि 3400 रुपये जुर्माना लगाया जाता है जो उचित नहीं | मर्डर तो मर्डर है जिसमे अवधि कम क्यूँ ?
महिला संगठन का यह कहना है कि - सरकार खुद हीं ऐसे जघन्य अपराध को बढ़ावा दे रही है | बदलते हुए समाज के साथ सरकार को ऐसे नियम ख़त्म करने होंगे |
कुवैत पूरी तरह रुढ़िवादी और पुरुष प्रधान समाज के रूप में जाना जाता है जिसमे महिलाओं का संघर्ष जारी है | महिला अधिकार के समर्थन में उतरने वाले लोगो ने बताया कि - सऊदी अरब धीरे धीरे सजग हो रहा है और महिलाओं के कई डिमांड को पुरे किये , मगर कुवैत ऐसा नहीं कर रहा |
मालुम हो कि किसी खाड़ी में योग का नया ट्रेंड विज्ञापन पर लगा प्रतिबन्ध महिलाओं के स्वतंत्रता को उजागर करने की एक आवाज है |
विपक्षी सांसद हमदान आजमी ने खुले में योग करने को सांस्कृतिक उपहास बताते हुए प्रतिबन्ध का समर्थन किया है जिसपर महिलाओं ने अपने अधिकार के खिलाफ सरकार के इस फैसले को व्यक्तिगत आजादी का हनन बताते हुए कहा कि - हमें अपनी आजादी को लेकर सर्द रात में भी प्रदर्शन करना पड़ रहा है | यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जबतक सरकार प्रतिबन्ध हटा नहीं लेती |
महिलाओं द्वारा जारी इस प्रदर्शन अभियान में योग सिर्फ एक मुद्दा है , मामला हर तरह की आजादी मिलने का है | सड़को पर उतरी महिलाओं ने कहा - हम बंदिशे नहीं सहेंगे |
विपक्षी सांसद हमदान आजमी का यह कहना कि - खुले में योग करना सांस्कृतिक उपहास है तो इन दिनों देखा जाए तो योग का रास्ता सिर्फ योग नहीं रहकर कहीं और निकलता हुआ दिखाई पड़ रहा है | आज योग और एक्सरसाइज का पोशाक भी इतना खुलापन लिया है जिससे एक सौम्य व्यक्तित्व की धनी महिला भी शर्मसार हो जा रही है | सवाल खुले में योग का नहीं , बहुत सारी महिलायें और पुरुष ऐसा स्वतंत्रता को बढ़ावा नहीं देना चाहते जिसमे आने वाले कल को अपनी संस्कृति बिकी हुई मालुम पड़े | यह महिला और पुरुष दोनों के लिए लागू होना चाहिए |
जहाँ तक महिलाओं के शक के आधार पर मर्डर की बात है तो यहाँ तलाक बेहतर रास्ता है , मर्डर क्यूँ ? इस मर्डर पर कुवैत सरकार को रोक लगानी चाहिए | पति अपनी बेगम को क्यूँ मारे ? अगर पत्नी का किसी अन्य पुरुष से सम्बन्ध का शक जाया है तो उन्हें तलाक दीजिये , मर्डर क्यूँ ? यह जघन्य अपराध में इतनी छोटी राशि और 3 साल जेल की सजा , महिलाओं की अनमोल जिंदगी को शर्मसार करने जैसा है |
विश्व
के किसी भी देश की सरकार को स्त्री और पुरुष का मान - सम्मान दोनों बराबर
देने जैसा नियम बनाना चाहिए | संस्कृति दोनों के लिए बराबर है तो नियम
दोनों के लिए बराबर हो | क्यूंकि विश्व में आधी आबादी पुरुषो की है और आधी
आबादी महिलाओं की , तो ऐसे में तराजू के दोनों पलरा को बराबर रखना सरकार का
काम है | वहीं स्वतंत्रता का मतलब यह कदापि न हो कि महिला और पुरुष दोनों
के तन से कपड़ा सरकता हीं चला जाए जैसे की आये दिन देखने को मिलता है | मन
की स्वतंत्रता बहुत जरुरी है दोनों के लिए | ....... ( न्यूज़ / फीचर :-
रुपेश आदित्या , एम० नूपुर की कलम से )
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