अभिनेता व राजनेता एम जी रामचंद्रन की 106 वीं वर्षगाठ पर विशेष | Bhavyashri News
- by Admin (News)
- Jan 17, 2023
आज अभिनेता व राजनेता एम जी ( मारुदुर गोपालन ) रामचंद्रन की 106 वीं वर्षगाठ है | आज हीं के दिन उन्होंने इस दुनिया में कदम रखा था और धीरे धीरे ऊँचाइयों को छूते गए | धीरे धीरे अपनी कला की जादू से करोड़ों फैन बना लिए | उनकी फैन्स फ्लोविंग एक मिशाल बनी जो दुनिया को आचम्भित करने वाली थी | उनके व्यक्तित्व और उनका प्रभाव ऐसा था कि इस दुनिया को छोड़ने के बाद भी उनकी यादें आज भी लोगो के दिलो में जिन्दा है |
अभिनेता रहे तो भी चुनिंदा पिक्चरों को हीं अपनाया , नेता बने तो गाँधीवादी नीति पर चलते रहे |
इनका जन्म 17 जनवरी 1917 को श्रीलंका के नावालापीटीय में हुआ था | पिता व बहन की मृत्यु के बाद इनकी माँ श्रीलंका से भारत आ गई और भारत की होकर रह गई |
7 वर्ष की उम्र में इन्होने ड्रामा कंपनी का हाथ थामकर इस क्षेत्र से अपनी गति को मोड़ दी | 19 साल की उम्र में फिल्म "सती लीलावती" जो 1936 में बनी थी , इस फिल्म में उन्होंने पुलिस इन्स्पेक्टर की भूमिका निभाकर सुर्खिया बटोरी | ऐसा शायद पहली बार हुआ था जब लोगो ने महसूस किया कि स्टार के प्रति लोगो के मन में कितना जज्बात पैदा होता है ? क्यूंकि जो किरदार वे पर्दे पर निभाते है उसे दर्शक अपनी जिंदगी में उतारने की कोशिश करते है |
यह स्टार के लिए सबसे बड़ी ख़ुशी की बात होती है और दुनिया के लिए सोंच का विषय भी और यही कारण है कि वे कभी भी ऐसी विवादित फिल्मे करना पसंद ही नहीं किये जिसमे स्टार की भूमिकाएं दर्शको के दिल को चोट पहुंचा दे या फिर जिससे देश की क्षति हो |
हम बात कर ले फिल्म "देवदास" की तो उन्होंने इस फिल्म को सिर्फ इसलिए नहीं किया था क्यूंकि देवदास बनने वाले किरदार ने शराब पी थी |
दर्शको के दिल में जो आहिस्ता - आहिस्ता प्रेम का घर बना था , मरणोपरांत उन्होंने कायम रखा | इनकी हर फिल्मे रिकॉर्ड तोड़ आमदनी का परिचय बनता रहा | वहां के नागरिक उन्हें अपने घर आने को आमंत्रित करते थे |
फिल्म लाइन में रहने पर इतना संभव नहीं होता परन्तु जैसे वे राजनीति की तरफ कदम मोड़े आमंत्रण स्वीकार करने का सिलसिला बढ़ता चला गया और पहली बार 1962 में वे विधायक बने |
दीवानगी की हद उनके फैन्स में इतनी देखी गई कि - दर्जन से ज्यादा फैन ने सिर्फ इसलिए सुसाईड कर लिया था जब उन्हें पता चला कि एम जी रामचंद्रन की किडनी खराब हो गई है | इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता कि फैन्स के सुसाईड करने पर वे विचलित नहीं हुए होंगे | कोई भी सेलिब्रेटी फैन्स को ऐसा करने की स्वीकृति नहीं देते और न देंगे परन्तु फैन्स की दीवानगी सदियों से लेकर आज तक जारी है क्यूंकि उनके मन में सिर्फ एक हीं आवाज आती है - जीना तेरे लिए है खैर ....... |
24 दिसंबर 1987 को जब इनकी मृत्यु की खबर सामने आई तो लगभग 30 फैन्स ने अपनी जान गँवा दी | अंतिम संस्कार में 12 लाख से भी ज्यादा फैन्स शामिल होकर अपनी दीवानगी व परिवार होने की निष्ठा जमाने को दिखला दिया | अंतिम संस्कार के वक्त हिंसा का हद हो गया |
जानकारी के आधार पर आपको बता दे कि वहां की सरकार ने दंगा भरकने पर गोली चलाने का आदेश भी दे दिया जिसमे 29 लोगो की मौत हो गई वहीं 49 पुलिसकर्मी भी घायल हो गए , ऐसा पहली बार हुआ था |
इनकी जिंदगी के हर लम्हें को याद करके मुझे याद आया "बाबू मुशाए" जी हाँ बॉलीवुड के प्रथम सुपरस्टार राजेश खन्ना | इनके लिए भी लोगो की दीवानगी ऐसी हीं थी जो एक इतिहास बना |
रामचंद्रन जी को एक बार गोली लगी तो 50 हजार फैन्स अस्पताल में इकठ्ठा होकर सड़को पर मातम मना रहे थे | सड़को पर भीड़ की संख्या देखकर पुलिस फ़ोर्स बुलाया गया था | ऐसी ही धूम मची थी बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ जब फिल्म कुली की शूटिंग के दौरान वे जख्मी हुए तो लोग तड़प उठे जैसे की फैन्स की जान हीं निकल गई हो |
रामचंद्रन की मौत हुई तो पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता जी 21 घंटो तक उनके शव के पास खड़ी रही इसलिए कि वे इनसे प्यार करती थी जबकि ये 31 साल उम्र में बड़े थे | आज ये लिखने का हक़ नहीं क्यूंकि आज ये दोनों इस दुनिया में नहीं और यह उनका निजी मामला था शायद इसलिए जयललिता जी ने कभी विवाह नहीं किया | जब भी वे विवाह की बाते करती तो रामचंद्रन जी उनसे स्वयं की पूर्व विवाहित होने की बात कह दिया करते |
अपनी इज्जत का एक कतरा भी कम न होने देने की कोशिश थी और ऐसा हीं हुआ , उन्होंने अंतिम क्षण तक गरिमा को बरकरार रखा | मृत्यु के पहले का दौर भी कुछ ऐसा हीं था की जब भी वे दीखते उनपर फूल बरसाया जाता , मरने के बाद भी लम्बी कतारों ने फूल बरसाते हुए उन्हें मंजिल तक पहुंचाया |
शादी तो इनकी 3 बार हुई मगर संतान का सुख नहीं मिला | किसी शायर ने शायद ठीक ही लिखा है - "कभी किसी को मुक्कमल जहाँ नहीं मिलता , कहीं जमीं तो कहीं आसमां नहीं मिलता" |
ये परोपकारी और मानवतावादी आइकॉन थे | 1988 में इन्हें भारत के सर्वोच्य नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया वहीं भारत रत्न से भी सम्मानित किये गए | वे भारत में मुख्यमंत्री बनने वाले पहले अभिनेता थे जो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद पर आसीन रहे इसलिए वे इस दुनिया से अलविदा होने के बावजूद जिन्दा हैं | .......... ( न्यूज़ / फीचर :- रुपेश आदित्या , एम० नूपुर की कलम से )
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