Russia & Ukraine War - युक्रेन की 6 वर्ष की जख्मी बच्ची को गोद में लिए डॉक्टर रो पड़े , कहा - यह पुतिन को दिखाओ | Bhavyashri News
- by Admin (News)
- Feb 28, 2022
युक्रेन की धरती पर रूस द्वारा छिड़ा युद्ध , इस युद्ध में युक्रेन डट कर खड़ा है वह भी अकेला | अमेरिका सहित नाटो के देशो ने युक्रेन को सेना भेजने व मदद करने से भी इंकार कर दिया , बावजूद वहां के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की हार नहीं माने और डट कर अभी तक युद्ध का सामना कर रहे हैं |
जहाँ पूरी दुनियां की निगाहें इसी युद्ध पर अटकी पड़ी है और रूस की इस बेतुका युद्ध और छोटी मानसिकता की निंदा करते हुए कई देश युद्ध रोकने की बात कर रहा है | वहीं एक दिल दहला देने वाली घटना एक डॉक्टर को भी रोने पर मजबूर कर गया |
यह तस्वीर जिसे आप देख रहे है , ये युक्रेन की एक मासूम 6 वर्ष की बच्ची की है | रूस द्वारा मारियुपोल शहर के पास की गई बमबारी से यह बच्ची जख्मी हुई | उस बच्ची को परिवार वाले कल रविवार को अस्पताल लेकर आये | डॉक्टर की टीम इस बच्ची को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा दी , मगर अफ़सोस बच्ची को बचाया नही जा सका | डॉक्टर अपने संघर्ष में हार गए | इलाज के दौरान उस बच्ची को पम्प भी किया गया , इसी बीच एक डॉक्टर विचलित होते हुए बोल पड़े - ये पुतिन ( रूस के राष्ट्रपति ) को दिखाओ | इस बच्ची की आँखे देखो , यह कहकर डॉक्टर रोने लग गए |
इस मासूम बच्ची का क्या कसूर ? जिसने अभी जिंदगी जिया नहीं , दुनियां देखा नहीं और युद्ध में दम तोड़ दिया |
युक्रेन में अब तक 198 आम नागरिको की मौत हो चुकी है |
जानकारी के आधार पर - जर्मनी की राजधानी बर्लिन में एक लाख से ज्यादा लोगो ने रूस के खिलाफ प्रदर्शन करने सड़क पर उतर गए है | पुतिन के इस हड़कत पर रूस के नागरिक तक विरोध जाता रहे हैं | वहीं युक्रेन की एक लाख से ज्यादा नागरिक देश छोड़कर जा चुके हैं |
युक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्री कलेवा ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा - हम सभी को रूस पर तबतक दबाव बनाए रहना चाहिए , जबतक कि रूस की सेना युक्रेन से बाहर नहीं चली जाती |
युक्रेन के राष्ट्रपति निडर होकर अकेले युद्ध का सामना कर रहे हैं | सहानुभूति का लेप तो सभी देश लगा रहा है , मगर साथ देने के लिए किसी भी देश का कदम अभी तक आगे नहीं बढ़ा है | अपनी सुझबुझ का परिचय देते हुए राष्ट्रपति ने युक्रेन की जनता से बोल दिया - मैदान ए जंग में कूद जाने के लिए और सभी के हाथो में आटोमेटिक राइफल थमा दी है | साथ हीं लोगो के बीच ट्रेनिंग की तैयारी भी जोरो पर चल रही है | शहरी सीमाओं पर सैनिको के साथ ये सभी हथियार लेकर डटकर खड़े रहेंगे और युक्रेन को जीत हासिल कराने के लिए आगे बढ़ते रहेंगे |
गुरुवार को युद्ध की शुरुआत हुई और युक्रेन का महत्वपूर्ण व पॉवरफूल जगहों पर रूस की सेना ने धावा बोला - बैंक लूट लिए गए , कई इमारते छतिग्रस्त हुई और कई जगहों पर कब्ज़ा जमाया | अपनी मजबूती का फायदा उठाकर परमाणु हथियार से समपन्न देश रूस ने वहां हमला बोला जिस देश को वह स्वयं से कमजोर समझ रहा था | अक्सर निगाहें स्वयं से कम शक्ति वाले को तंग करता है | स्वयं से ज्यादा शक्तिशाली की तरफ उनकी निगाहें नहीं टिकती |
रूस युक्रेन में अपनी सरकार बनाने के लिए तत्पर दिखाई पड़ रहा है , मगर क्या उनकी मंशा पूरी हो पाएगी ? युक्रेन के लोगो के मन में भरा आक्रोश और रूस के लोगो के नफरत पर सहानुभूति का लेप क्या पुतिन चढ़ा पायेंगे ? अब तो इनकी कथित पुत्री भी इनके विरोध में खड़ी हो चुकी है |
युद्ध के मैदान में भले हीं एक की जीत हो , मगर हार दो देश का होता है | एक उनकी जो बिना कारण दुनियां छोड़ने पर मजबूर होते है , दूसरा संपति की क्षति और तीसरा विकास का ध्वस्त हो जाना | इससे बेहतर था कि जितनी भी सेना हथियार व शक्ति रूस ने अपनी ताकत दिखाने पर खर्च किया , वह देश के विकास और विश्वास में खर्च कर देते तो दुनियां के सामने एक सफल हीरो बनकर उभर जाते , मगर ऐसा नहीं हुआ | उनके मन में तालिबान जैसी जीत की मंशा उमड़ आया और उन्होंने युक्रेन पर हमला बोल दिया |
इस तबाही और बर्बादी के बाद युद्ध में जीत किसकी होती है , यह तो अभी कहना मुश्किल है | मगर युक्रेन की जीत होती है तो एक सफल नेता के रूप में वहां के राष्ट्रपति जेलेंस्की छा जायेंगे और यदि उन्हें हार का सामना करना पड़ता है तो भी दुनियां उन्हें याद रखेगी कि एक राष्ट्रपति हार के डर से देश को छोड़ा नहीं बल्कि आखिरी वक्त तक अपनी जनता की हिफाजत के लिए अकेले डटकर सामना किया | यहाँ भी युक्रेन के राष्ट्रपति की हीं जीत है | यह कहना शायद अतिश्योक्ति न होगा कि - गलत राजनीति , गलत मंशा , गलत शक्ति से भले हीं जीत हासिल कर लिया जाए | मगर जीतकर भी लोग हार जाते है और हारा हुआ देश अपनी अच्छाई के लिए अपना सबूत छोड़ जाती है और यहीं सबूत उनकी हार नहीं बल्कि जीत होती है |
अब
रूस के राष्ट्रपति ने युक्रेन से बातचीत करने का प्रस्ताव दिया है | यह आने
वाले समय में हीं देखा जा सकता है कि युद्ध यहीं रुक जाता है या जारी रहता
है | मगर हर समस्या का समाधान सरल तरीके से बातो से किया जा सकता है जिसमे
किसी भी तरह का क्षति न होते हुए मामला आसानी से सुलझाया जा सकता था |
यहीं विकास का सबूत है | ........ ( न्यूज़ / फीचर :- रुपेश आदित्या , एम०
नूपुर की कलम से )
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