महानायक अमिताभ बच्चन ने , फ्रीलांस पत्रकार को गुप्तदान देकर , उनके कलम की स्याही को गति दी |
- by Admin (News)
- Jun 02, 2021
भारत के गुरुर कहे जाने वाले महानायक अमिताभ बच्चन ने , हाल हीं में इस कोरोनाकाल के त्रस्त घड़ी में , आर्थिक संकट से घिरे फ्रीलांस पत्रकार के कलम की स्याही के गति को भी रुकने से बचा लिया |
कोरोनाकाल के मार का असर मीडिया पर भी पड़ा है | जिसपर किसी की भी नजर नहीं पड़ी और कई फ्रीलांस पत्रकार और फोटोग्राफर्स काम न मिलने पर , गहरे आर्थिक संकट से गुजर रहे है | महानायक ने पूर्व में भी बहुत तरीके से गुप्तदान किया है | इस बार भी उन्होंने गुप्तदान हीं किया , ताकि इसका पता किसी को न चले | परन्तु सूर्य से निकलता हुआ प्रकाश छुपाये नहीं छुपता , उसकी रौशनी तो बहुत दूर तलक पहुंचती है |
ऐसे में महानायक ने आर्थिक संकट से गुजर रहे फ्रीलांस पत्रकार व फोटोग्राफर को आर्थिक सहायता देकर , उनकी बहुत सारी समस्याओं का निदान कर दिया , जैसे :- बिजली बिल , मकान किराया , बच्चों के स्कूल की फीस , राशन - पानी आदि बुनियादी जरूरतों को पूरा करके उन्हें राहत पहुंचाया | महानायक द्वारा किये गए दान व सहयोग के अंदाज पर दुनियां कायल हुई | वैसे भी महानायक की हर अदा का स्तर , उनके हीं व्यक्तित्व / कद व सोंच के अनुसार और भी उंचा बनाता है |
लॉकडाउन की घड़ी में , ऐसा पहली बार सुनने को मिला है कि महानायक ने एन्टरटेनमेंटवर्ल्ड से जुड़े हुए स्वतंत्र पत्रकारों के कलम में एक नए तरीके से , कलम में स्याही को भरने का विकल्प चुना और कोरोना महामारी जैसे लॉकडाउन की अवस्था में , उनके घर की व्यवस्था को बरकरार व सदृढ़ करने के लिए , उन्होंने कई स्वतंत्र पत्रकारों के आर्थिक स्थिति का जायजा लिया और उनके बैंक खाते में राशि ट्रांसफर की है | ताकि संकट के इस त्रस्त घड़ी में , उनके चेहरे पर मुस्कान और कलम की गति संचालित रहे |
पत्रकारों का कलम तभी अद्दभुत रूप से चलेगा , जब उनके घर की आर्थिक स्थिति सदृढ़ रहेगी और वे चिंतामुक्त रहेंगे | इसे माँ सरस्वती द्वारा एक उपहार कहा जा सकता है , जिसके माध्यम महानायक बनें |
महानायक अभी तक 15 करोड़ से ज्यादा की राशि दान कर चुके है और यह भी सच है कि , देश के लोगों को और भी जरुरत पड़ी तो वे अपने पारखी सोंच से कभी पीछे नहीं हटेंगे | ये सिर्फ फ़िल्मी पर्दें के स्टार नहीं , ये भारत के पटल पर भी स्टार है |
कोरोनाकाल के इस भयावह घड़ी में अनाथ हुए , दो बच्चो की जिंदगी को सवांरने का जिम्मा लेते हुए , इन्हें सुरक्षित व सुव्यवस्थित तरीके से योगदान देते हुए , इनके सर पर अपना हाथ रख दिया |
फिल्म बागवान , जो एक यादगार फिल्म बनी | महानायक ने इस फिल्म की स्टोरी में भी एक अनाथ , जो बड़े होकर सलमान खान बनते है , सर पर हाथ रखकर , उनकी जिंदगी को भी निखाकर प्रकाशवान बनाया था | आज इस त्रस्त घड़ी में भी , यह बागवान पर्दें पर हीं नहीं , दुनियां के पटल पर भी हकीकत में बागवान बनकर कदम बढ़ा रहे है और लोगों के उभरते हुए तपते जख्म पर अपनी भावनाओं का लेप चढ़ाते दिख रहे है |
महानायक की उंचाई सिर्फ कद से ऊँची नहीं है , उनकी सोंच एक अद्भुत प्रकाश लिए उन रास्तों में भी खड़ा हो गया , जहाँ से कलम की स्याही , दुनियां के लोगों को , आसमान पर बिठाता है | अगर देश का चौथा स्तम्भ कहे जाने वालो की कलम की गति ठहर गई , तो शायद ! सब कुछ ठहर जाएगा | यह सोंच का विषय है कि , इसपर सरकार और अन्य लोगों की नजर क्यूँ नहीं पड़ी ?
ऐसी स्तम्भ को और भी सदृढ़ करने के लिए , महानायक को आभार ! ...... ( न्यूज़ / फीचर :- भव्याश्री डेस्क )

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