खाना बनाने को लेकर दो बहनों में हुई लड़ाई , एक ने किया आत्महत्या | Bhavyashri News
- by Admin (News)
- Jul 12, 2021
कोटा की 16 वर्षीय एक बेटी , जिसका नाम सुनीता है , ने अपने गले में दुपट्टे का फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली | उसके परिवार वाले , उसे लेकर MBS अस्पताल पहुंचे , जहाँ डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया | सूचना मिलते हीं पुलिस मौके पर पहुंची और हंगामा कर रहे लोगों को शांत किया | बच्चे की शव को MBS मॉच्युरी में रखवाया गया है |
दरअसल दो बहनों के बीच खाना बनाने की बात को लेकर झगड़ा हो गया | इससे नाराज होकर बड़ी बहन ने पखें में चुन्नी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली | सुनीता के पिता का नाम विनोद कुमार है | ये लोग नयापुरा बस स्टेंड के पास रहते हैं | विनोद कुमार समानफेरी लगाने / बेचने का काम करते हैं | इनकी दो बेटियां और तीन बेटे है | पांच बच्चों में सुनीता दूसरे नंबर की थी , जो अब नहीं है |
सुनीता पढ़ी-लिखी नहीं थी , इससे भी वह बहुत ज्यादा खिन्न व आक्रोशित रहती थी | घरेलु काम को लेकर दोनों बहनों में लड़ाई अक्सर हो जाया करती थी | बच्ची की माँ उस दिन परिवार में किसी के मृत्यु हो जाने के कारण अहमदाबाद गई थी | विनोद कुमार फेरी में जाने से पहले बच्ची को खिचड़ी बनाने के लिए बोला | अब इसी खिचड़ी ने जिंदगी पर तहलका मचा दिया | खिचड़ी बनाने को लेकर दोनों बहनों में लड़ाई हुई | लड़ाई इतनी बढ़ी की बड़ी बहन सुनीता ऊपर अपने कमरें में चली गई और छोटी बहन खिचड़ी पकाने |
सुनीता का बड़ा भाई जब ऊपर कमरे में गया तो सुनीता पंखे से लटकी हुई थी | इसकी सूचना पुलिस को दी गई और परिजन सुनीता को लेकर MBS अस्पताल पहुंचे जहाँ डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया |
सूचना के आधार पर - छोटी बच्ची की उम्र 11 वर्ष है , तो बड़ी लड़की की उम्र 12/13या 14 होगी | इनकी उम्र खाना पकाने की नहीं , खेलने , खाने , पढ़ने - लिखने की थी | अधिकांशतः घरों में देखा जाता है कि - बेटियों पर बहुत हीं ज्यादा अत्याचार होता है | उन्हें जबरन खाना पकाने व घर की साफ़ - सफाई के लिए तंग व परेशान किया जाता है | पढ़ाई को भी ये लोग खेल मात्र समझते हैं | अगर पढ़ना हो तो , शर्त होती है घर का काम करके पढ़ना होगा | इसलिए खाना पकवाने के लिए ये लोग बच्चों को पढ़ाते नहीं और कम उम्र में घर का काम सिखलाते है | जैसे इन्होने बेटी को जन्म न देकर एक काम करने वाली को जन्म दिया हो |
बेटी का मोल पहचानिए , जब उसपर जिम्मेदारी आएगी तो वह घर का काम सिख लेगी | फिलहाल ये माता - पिता का काम है - खाना बनाकर या बनवाकर बच्चों को खिलाना और पालना | तभी ये बच्चें इनके बूढ़े होने पर इन्हें भी खिलाएंगे और अपना फ़र्ज़ निभाएंगे | मगर ऐसा होता नहीं , ये लोग बेटी पैदा होने पर एक बोझ समझकर पूरी तरह घर की जिम्मेदारी कम उम्र में इन्हें सौंपकर स्वयं 30 - 35 के उम्र में हीं जिम्मेदारी से हाथ ऊपर उठा लेते है | 10-11 वर्ष की बच्ची पर घर की जिम्मेदारी पर जाए तो लड़ाई तो होगी हीं | ज्यादा लड़ाई हुई तो बच्चों पर दो - चार हाथ लगाने से भी नहीं चुकते | अब आज की पीढ़ी तो समझेगी नहीं , क्यूंकि अभी तो उनका मन कच्चा है | उन्हें बालिग़ होने तक , घर के बड़ों को समझना होगा , वह घर अमीर हो , सामान्य या उससे कम | सबके बच्चें , बच्चें हीं होते है , इनपर घर का बोझ मत डालिए | इनकी भावनाओं को समझना बहुत जरुरी है , इसलिए बच्चे को बच्चा बनकर या फिर दोस्त बनकर समझिये और इन्हें समझाइये | बड़े बनकर नहीं ! ...... ( न्यूज़ / फीचर :- भव्याश्री डेस्क )

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