गोरखपुर के कॉलेज में B.Sc की छात्रा प्रियंका ने ख़ुदकुशी की | Bhavyashri News
- by Admin (News)
- Aug 01, 2021
गोरखपुर के दीनदयाल उपध्याय विश्वविध्यालय में शनिवार को एक चौका देने वाली खबर सामने आई है , जो बहुत हीं दुखद है | शाहपुर थाना क्षेत्र के जंगल सालिगराम पोखरा निवासी विनोद कुमारी की 24 वर्षीय पुत्री ने ख़ुदकुशी कर ली | मृत हुई पुत्री का नाम प्रियंका है |
प्रियंका B.Sc होम साइंस थर्ड इयर की छात्रा थी | वह शनिवार को होम साइंस की परीक्षा देने कॉलेज आई थी | उसने करीब 2 बजे कॉलेज के होम साइंस विभाग के स्टोर रूम में दुपट्टे का फंदा लगाकर ख़ुदकुशी कर ली | कॉलेज के एक स्टाफ ने लड़की को फंदे से लटका देखा तो इसकी सूचना कॉलेज प्रबंधक को दिया | लड़की की पहचान उसके पर्स से प्राप्त आधार कार्ड के जरिये किया जा चूका है | प्रियंका के पर्स में मोबाइल भी था , जिससे उसके घर वालो को सूचना दी गई |
पूछने पर प्रियंका के पिता ने कहा कि - घर में सबकुछ ठीक चल रहा था | हमारी बेटी कॉलेज आने से पहले तनाव में नहीं थी और ऐसा भी नहीं कि घर में उससे किसी की कहा - सुनी हुई हो | वह बहुत खुश होकर एग्जाम देने आई थी | प्रियंका के पिता ने ख़ुदकुशी करने का कारण या कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी |
प्रियंका के कॉलेज में की गई ख़ुदकुशी को लेकर , कॉलेज व्यवस्थापकगण आचम्भित व परेशान है | पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है | अब फोरेंसिक टीम भी घटना की जाँच में जुटी है , ताकि ख़ुदकुशी की सच्चाई का पता लगाया जा सके |
सूचना के आधार पर , इंस्पेक्टर कैंट सुधीर सिंह के अनुसार यह चिंतनीय सवाल है कि - आखिरकार छात्रा ने आत्महत्या क्यूँ की ? इसकी वजह तलाशना बहुत आवश्यक है वहीं तहकीकात जारी है | SP सोनम कुमार ने कहा है कि - परीक्षा से पूर्व छात्रा ने कॉलेज में आकर ख़ुदकुशी की , इसके पीछे आखिर क्या कारण हो सकता है ? इसका तहकीकात जल्द से जल्द करना जरुरी है | पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ जाने के बाद कारण का पता शीघ्र लगाया जा सकता है |
इन दिनों देखा जा रहा है - बच्चे ख़ुदकुशी को एक मजाक बनाकर अपनी जिंदगी से खेल रहे हैं | जिंदगी कोई खिलौना नहीं , यह उन्हें समझना होगा ! आये दिन बच्चे सर पर पढ़ाई का बोझ लेकर स्वयं को अकेला समझ बैठते है | ऐसे में परिवार की सख्ती उन्हें गलत रास्ते पर चलने को मजबूर कर देती है , जिसमे समाज का भी बहुत बड़ा हाथ है | पढ़ाई बोझ न बने , ऐसा कुछ करना बहुत जरुरी है | ताकि पढ़ाई को पिकनिक समझकर बच्चे खेल - खेल में अपनी शिक्षा पूरी कर अपनी जिंदगी में एक निखार लाये | क्यूंकि आने वाले कल को इन्हें हीं संभालना होगा |
यदि आज के बच्चे ऐसे है और ख़ुदकुशी को आम बना दिया , तो बहुत हीं भारी पड़ जाएगा समाज को | इसलिए अपने भविष्य को संभालिये और सजाइये , क्यूंकि बच्चे हीं आने वाले कल के लिए बहुत बड़ी ताकत है | वहीं बच्चों को भी यह सोंचना होगा कि - कोई भी समस्या सामने खड़ी हो , लेकिन उसका निदान ख़ुदकुशी नहीं हो सकता ! समस्या है तो उसके लिए समाधान भी है और समस्या पर पैनी दृष्टि डालते हुए समस्या का निदान किया जा सकता है |
बच्चों को संभालने के लिए बस इतना जरुरी है कि - उड़ते हुए पतंग को इतना भी ढीला मत छोड़िये की वह आकाश में विलुप्त हो जाए और डोर इतना जोड़ से भी मत खींचिए कि धागा पतंग से अलग हो जाए और पतंग उलटते - पलटते पताल में कहीं भटक जाए | इसपर सोंचना होगा - परिवार , समाज व देश को और अपनी संस्कृति को स्वच्छ विचारधाराओं के धागा से पिड़ोना होगा | ..... ( न्यूज़ / फीचर :- भव्याश्री डेस्क )
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