Aah ! Hindi Poem | आह ! कविता | Manisha Noopur Poem Aah | Bhavyashri News
- by Admin (News)
- Aug 04, 2021
आह !
मच्छली का मच्छलियों को खा जाना
कल तक भ्रम था , मेरे लिए
पर आज जब करीब से देखा
तो एहसास हुआ ! इनके दर्द का
रिसते लहू / क्लेश व पीड़ा का
लेकिन कितनी अजीब बात है !
छोटी मच्छालियाँ नहीं मार सकती
एक बड़ी मच्छली को
जो सैकड़ो को खा जाती है
महसूस कर देखा , तो लगा
शायद ! एकता नहीं इनमे
इसलिए ऐसा होता है
और तभी तो
मिट्टी लाल हो जाती है , अक्सर इनकी लहू से
( कविता :- आदित्या , एम० नूपुर की कलम से )
संबंधित पोस्ट
हमें फॉलो करें
सब्सक्राइब करें न्यूज़लेटर
SUBSCRIBE US TO GET NEWS IN MAILBOX
भावपूर्ण श्रद्धांजलि
Sushant Singh Rajput
- श्रद्धांजलि
- June 14
लाइव क्रिकेट स्कोर
शेअर मार्केट
Ticker Tape by TradingView
Stock Market by TradingView

रिपोर्टर
Admin (News)