अफगानिस्तान में तालिबान की मंत्रिमंडल सूची तैयार | आतंकियों के कसाई रहे शेरजई भी शामिल | Bhavyashri News
- by Admin (News)
- Aug 25, 2021
अफगानिस्तान की धरती मांग रही है मोर | इस धरती पर जबसे तालिबान का कब्ज़ा हुआ , त्राहि और तबाही मची हुई है चारो तरफ | खासकर महिला व बच्चों की जिंदगी पर गाज गिरता हुआ नजर आ रहा है | इन्हें हीं बंधक बनाकर पुरुषों को नाकामी का सबक सिखाता व परिस्थिति दिखाते हुए सरेंडर करने पर कर रहा मजबूर |
तालिबानियों ने अपनी हुकूमत की टीम भी तैयार कर ली है , जिसमे पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई भी शामिल है |
मंगलवार को तालिबान ने शासकों का चुनाव कर दिया , जिसका चेहरा दुनियां के सामने स्पष्ट होता दिखाई पड़ रहा है | जिसमे 7 चेहरे नजर के सामने है | यह अफगानिस्तान का दुर्भाग्य हीं है कि खलील - उर - रहमान हक्कानी भी इन सात की सूची में शामिल है |
हक्कानी का नाम अमेरिका के मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में शामिल है | जिसपर 50 लाख डॉलर का इनाम भी रखा गया है | इसके साथ हीं दूसरा नाम अब्दुल गनी बरादर है , ये तालिबान का सह संस्थापक है | मुल्ला याकूब तालिबान संस्थापक का लड़का है | डॉक्टर अब्दुल्ला पूर्व प्रधानमंत्री और हामिद करजई पूर्व राष्ट्रपति के साथ हनीफ अतमार और लुल्बुद्दीन हेकमत्यार भी इन नामों की सूची में शामिल है |
गुल आगा शेरजई को तालिबान का वित्तमंत्री बनाये जाने की सूचना जारी की गई है | यह तालिबान के कट्टर विरोधी हुआ करते थे | इनका नाम हीं तालिबान के कसाई से विख्यात था | गंधार का गवर्नर रहने के समय उन्होंने तालिबान के सफाया में अहम भूमिका निभाई थी | अफगानिस्तान के बड़े नेताओं में इनका नाम शुमार है |
2001 में नाटो बलों के नेतृत्व में जब अमेरिका ने तालिबान का सफाया करने के लिए , अफगानिस्तान पर हमला बोला था | उस वक्त शेरजई ने अमेरिका का साथ दिया था | उस समय गुल आगा शेरजई अफगानिस्तान के वारलॉर्ड थे | शेरजई दक्षिणी प्रान्त कंधार में सीआईए के साथ मिलकर तालिबान के खिलाफ लड़े थे | आज वही शेरजई सिर्फ हाथ हीं नहीं मिलाया , गले भी मिल गए और तालिबानों के साथ सत्ता चलाने के लिए कदम आगे बढ़ा लिया | ऐसे इंसानों को क्या नाम दिया जाए ? जिसने अपने हीं धरती को आतंकियों के हवाले करते हुए उनके गिरोह में शामिल हो गए |
यह राज दुनियां से छुपा नहीं है कि - तालिबान सर छुपाने के लिए पाकिस्तान जैसे देश का सहारा लेता है और पाकिस्तान सिर्फ मोहरा बनाने के लिए इन तालिबानियों का इस्तेमाल करता है | लेकिन इन दोनों को शायद मालूम नहीं कि दोनों एक - दूसरे से लड़ते लड़ते ख़ाक में मिल जायेंगे और हाथ कुछ भी न लगेगा | इसे कहते है - "न माया मिली न राम" | बुद्धिमानी उसी में है कि किसी एक को चुन लिया जाए |
मगर चलते - चलते इतना तो बताना जरुरी है कि - हर देश को अपनी देशभक्ति के लिए जीना चाहिए | आतंकियों के साथ अगर हाथ मिलाया जाए , तो वहीं आतंकी उन्हीं के देश में रहकर उन्हीं को खाक करने में देरी नहीं करेंगे | कहते है - "जियो और जीने दो" और अपने देश को खुबसूरत बनाओ | मगर उस इंसान का दुर्भाग्य है कि वो अपने विकास के लिए कम जीते है और दूसरे के विनाश में अपना समय बर्बाद करते है | खैर ...... अभी भी वक्त है चेतने का और अपनी छवि को फिर से एक अच्छे चरित्र व रूप में तब्दील करने का | क्यूंकि अभी मौका भी है और दस्तूर भी , साथ हीं एकता की बात क जाए तो- सारे देश की शक्ति अगर एक साथ मिल जाए , तो इन आतंकियों का खात्मा करना चुटकियों का खेल है | इसलिए हर देश को देश के लिए हीं सोंचना चाहिए न की आतंकियों के विकास के लिए | ....... ( न्यूज़ / फीचर :- भव्याश्री डेस्क )

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