इंदौर में अंसार अहमद की पिटाई से रीढ़ की हड्डी टूटी , पत्नी की मौत | मामला दूसरी बार थाने पहुंचा | Bhavyashri News
- by Admin (News)
- Aug 27, 2021
इंदौर नगर शहरी क्षेत्र में बुधवार को एक पत्नी की मौत | पति ने अपनी पत्नी को इतना पीटा कि वह बुरी तरह घायल हो गई | बावजूद पत्नी के फोन करने पर पति ने फोन पर हीं तीन तलाक देकर संबंधों को तोड़ तीसरी शादी करने के लिए कदम बढ़ा दिया |
महिला का नाम ताहिरा है और पति का नाम अंसार अहमद , ये कृष्णबाग़ कॉलोनी निवासी हैं | ताहिरा की उम्र 35 वर्ष है और इनपर पिटाई जैसी प्रताड़ना आज से 5 दिन पूर्व हुआ था | पिटाई ऐसी जो असहनीय हो जाए ! क्यूंकि इनके पति अंसार ने लात - घुसे से तो मारा हीं साथ हीं डंडे का भी सहारा लिया | उस दर्द को तड़प - तड़प कर जीया ताहिरा ने | यह तड़प कोई आम नहीं था , यह तड़प ऐसी थी जिसमे पिटाई के दौरान उनकी रीढ़ की हड्डी हीं टूट गई |
ताहिरा टूटी हुई रीढ़ के सहारे हीं किसी तरह पुलिस चौकी पहुंची और अपने पति की करतूत को दर्ज कराया | पुलिस ने मारपीट और अन्य धाराओं के साथ केस दर्ज कर अंसार अहमद को गिरफ्तार कर लिया और अगले हीं दिन जमानत पर छोड़ भी दिया | जिससे वह अपने घर उत्तरप्रदेश के आजमगढ़ में भाग निकला |
ताहिरा की बहन राशिदा के अनुसार अंसार अहमद की उनकी बहन से दूसरी शादी है | उनके 3 बच्चें हुए और तीनों इस दुनियां में नहीं | अंसार अपनी पूर्व पत्नी के साथ भी मारपीट किया करता था , जिससे वो अलग हो गई | बावजूद ताहिरा का उसी के साथ निकाह हुआ , यह आश्चर्य की बात है !
वहां की सब इंस्पेक्टर प्रियंका शर्मा है और इनकी नज़रों में सारी बातें दर्ज है |
ताहिरा की रीढ़ की हड्डी टूट गई | पांच दिन किसी तरह तड़प कर गुजारा और फिर यह तड़प प्रकृति के कैमरे में कैद होकर रह गया |
अब ताहिरा इस दुनियां में नहीं , जो अपना दर्द बयाँ कर सके या पुलिस चौकी फिर से पहुँच सके इस अपराध को दर्ज कराने के लिए , क्यूंकि उसकी मृत्यु हो चुकी है | दुःख इस बात का है - पिटाई के बाद जब मामला थाने पहुंचा , तो वहां भी ताहिरा को इन्साफ नहीं मिला और उनके अपराधी पति को छोड़ दिया गया | आजमगढ़ जब वह पहुंचा , तो ताहिरा ने उसे फोन किया | तो फोन के माध्यम से हीं तीन तलाक देते हुए दूसरी विवाह की बातें कर दी |
दर्द में डूबी महिला , जाये तो जाये कहाँ ? इस स्थिति में जहाँ आज भी 75% से ज्यादा महिला बेरोजगार है | न पति ने इलाज कराया और न पुलिस प्रशासन ने , न मायके वालो ने | किसी ने आवश्यकता नहीं समझी , शरीर के टूटे गए महत्वपूर्ण अंग को जोड़ने के लिए | घर में दवा खाकर वह दर्द को सहती रही | मंगलवार को उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया , जहाँ डॉक्टर ने इलाज के दौरान यह कहा कि - उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई है और इलाज के दौरान हीं बुधवार को ताहिरा की मृत्यु हो गई |
अंसार अहमद पर आजमगढ़ में भी पूर्व में तीन तलाक बोलने पर भी केस दर्ज किया गया था | लेकिन बाद में ताहिरा ने अपने पति को एक मौका देती हुई उसके साथ आजमगढ़ से इंदौर चली आई | सूचना के आधार पर - यह बाते हम आप तक पहुंचा रहे है , परन्तु तीन तलाक बोलने के बाद फिर से उसी पति के साथ रहने वाली बात कैसे संभव हो सकता है और वो इंदौर कैसे आ सकती है , पति के साथ रहने ? जबकि इस मजहब में बड़ा हीं सख्त नियम लागु किया गया है पति के लिए कि - वह बहुत सोंच - समझकर अपनी पत्नी को तीन तलाक बोले | क्यूंकि तलाक देने के बाद दूसरे के संग उस महिला को शादी करनी पड़ती है , फिर उसे तलाक देने के बाद अपने पहले पति के साथ रहने की इजाजत उनका मजहब देता है |
हाँ ये बात अलग है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत से तीन तलाक का मामला हीं हटा दिया है , जो महिला के लिए बहुत हीं सुविधाजनक है | तभी मुस्लिम महिलायें अपनी सुरक्षा / प्रतिष्ठा को बरकरार व जीवित रखने के लिए प्रधानमंत्री को हर वर्ष राखी भेजती है |
इन दोनों की शादी के 20 वर्ष पुरे हो चुके थे और एक पुरुष दो महिला को प्रताड़ित कर , तीसरी विवाह के लिए कदम बढ़ा चूका है | इसे शायद दुर्भाग्य कहा जा सकता है !
सूचना के आधार पर - वहां कि सब इंस्पेक्टर प्रियंका शर्मा का कहना है कि - महिला का मेडिकल कराने के बाद पति को गिरफ्तार किया गया था | जमानती अपराध के कारण अंसार को छोड़ दिया गया | अब जब परिवार वालो ने अपना ब्यान दर्ज किया है , तो ताहिरा के पोस्टमार्टम के बाद फिर से अब PM रिपोर्ट के आधार पर करवाई की जायेगी |
जब डूब गई नैया भंवर में तो गोता लगाना आरम्भ हुआ | आज यह सुनकर एक बार फिर हम दुखी हो गए | यह दर्द पढ़कर / सुनकर / जानकर मन दुखी हो गया | आजाद भारत की महिलाओं का जीवन कब सतरंगी बनेगा ? अफ़सोस इस बात का नही कि दर्द मिला ! अफ़सोस इतना है कि महिला का कसूर सिर्फ इतना था कि - "वह महिला बनी" | जहाँ आधी आबादी महिला की है , वहां अपराध क्यूँ ?
आज आजादी को मिले 75 वर्ष पुरे हो चुके है | सत्ता तो आधा मिल गया महिलाओं को , मगर तड़प आज भी पल - पल जारी है | रेशमी कपड़ों में लिपटकर सिसक - सिसककर रो रही जिंदगी महिला बन बेचारी है |
इंदौर नगर में एक महिला के साथ ऐसा हादसा हुआ है , ये पहला मामला नहीं है और न इसे आखिरी कहा जा सकता है ! अब तो अफ़सोस कर कर के आदत सी पड़ गई है , एक रूटीन सा बन गया है | सुबह हुआ नहीं कि Whatsapp पर सबको Good Morning या कोई प्यारा सा इमेज भेज दीजिये , यह जरुरी बन गया | उसी तरह पुरुषों की पिटाई खाइए और चाय का मजा लीजिये , ऐसा हीं लगभग एहसास महिलाओं की जिंदगी का देखा जा रहा है |
चलते - चलते हम बस इतना कहना चाहेंगे कि - महिलाओं में क्षमादान की प्रवृति कितना और कब तक ? हमें याद आ रहा है - अनुभव सिन्हा की फिल्म "थप्पड़" जो लिखने वाले ने इस विषय को बहुत हीं सोंच - समझकर लिखा था | या तो इस दर्द को उसने भोगा होगा और नहीं तो अपने ह्रदय से जीया होगा , कलम का यहीं तो स्वरुप है , जहाँ दर्द लिखा जाता है , पीया जाता है और कलम के माध्यम से जख्मों पर मरहम भी लगाया जाता है | खासकर हम उन्हें कहना चाहेंगे कि - जिंदगी को फिल्म थप्पड़ न बनाये नहीं तो बिखर जायेगी जिंदगी और महिला स्वयं को स्वावलंबी बनने की तरफ कदम उठाये , तभी ऐसे अपराधों को रोकना संभव हो पायेगा | ..... ( न्यूज़ / फीचर :- आदित्या , एम० नूपुर की कलम से )

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