महिलाओं को इज्जत करने की ट्रेनिंग नहीं दी गई है तालिबानियों को , सुनकर हीं शर्मसार है लोग | Bhavyashri News
- by Admin (News)
- Aug 28, 2021
अफगानिस्तान पर महिलाओं की स्वतंत्रता और लोगों के साथ ह्युमन राइट्स जो मानवाधिकार के उलंघन को लेकर छपता रहा है , जिसकी जानकारी वैश्विक संघठन तक पहुंची और उन्होंने अपनी नाराजगी दिखाते हुए अफगानिस्तान की फंडिंग पर रोक लगा दी |
संयुक्त राष्ट्र ने भी कहा है कि - ह्युमन राइट्स पर तालिबानियों का अंकुश ठीक नहीं | ये तालिबान 1996 से लेकर 2001 तक राज किया और देश को नरक बना दिया | जिससे कि उस वक्त भी तबाही मची और चीखें रो - रोकर अपनी स्थिति बयाँ करता जा रहा था | उस वक्त भी महिलाओं की जिंदगी शोषण से भरी हुई नजर आ रही थी | उन्हें सड़को पर कोरो से पीटा जाता था और पत्थर से मारकर उनकी हत्या ये तालिबानी कर दिया करते थे | उनकी निर्दयता पर कोई लगाम / रोक नहीं | आज एक बार फिर वहीं त्राहि करवटे बदलता जान पड़ रहा है |
मुजाहिद के अनुसार - महिलाओं को घरो में हीं रहने की सलाह दी गई है | उन्होंने साफ़ शब्दों में सन्देश दिया है कि - हम कोशिश कर रह है कि महिलाओं पर गलत बर्ताव न किया जाए और इसके लिए तालिबानियों को ट्रेनिंग दी जायेगी | महिलायें डरे नहीं , उन्हें काम करने दिया जाएगा | परन्तु पहले हालात सामान्य हो जाने दीजिये | हम खुद उन्हें काम करने की मंजूरी देंगे |
तालिबानों का यह हुकूमत पूरी दुनियां की महिलाओं के मन पर एक दर्द देता है कि - हम ग्लोबल दुनियां में जीते हुए भी आखिरकार किसके आदेश का पालन करे ? आधी आबादी महिला की है और आधी पुरुष की | फिर महिलाओं पर ये जुर्म क्यूँ और कब तक ?
तालिबान ने जब काबुल पर कब्ज़ा किया , तो कहा था कि - उन्हें कामकाज या रोजगार के लिए घर से नहीं निकलना चाहिए | वे घर के बाहर महफूज नहीं है , क्यूंकि तालिबानियों को महिलाओं को इज्जत करने की ट्रेनिंग नहीं दी गई है | यह बात तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के द्वारा कही है |
यह जानकारी सूचना के आधार पर आप तक पहुंचाई जा रही है - यह शब्द महिलाओं को खंजर की तरह चुभता हुआ जान पड़ रहा है कि महिलाओं की इज्जत करने की ट्रेनिंग तालिबानियों को नहीं दी गई है | काश ! कि इन तालिबानियों को पैदा करने वाली माता इस बात को जान पाती , तो सिर्फ अफगानिस्तान हीं नहीं , विश्व का रूप - रंग कुछ और हीं होता | परिस्थिति करवटे तो बदल रही है , मगर धीरे - धीरे और महिलाओं को घुटन भरी जिंदगी जीने पर मजबूर होना पड़ रहा है |
अपनी लिखी एक कविता जिसका चंद लाइन हम शेयर कर रहे है कि - बड़ी मच्छली छोटी मच्छलियों को खा जाती है | क्या ऐसा नहीं हो सकता कि छोटियां मच्छलियाँ मिलकर एक बड़ी मच्छालियाँ को मार दे ! मगर ऐसा नहीं ही सकता , क्यूंकि एकता नहीं इनमे | इसलिए धरती लाल हो जाती है अक्सर इनकी लहू से | यह पंक्ति भले हीं एक साधारण वाक्य लगे पढ़ने में , मगर गौर किया जाये शब्दों पर तो - शायद ! इसमे जिंदगी का सार छुपा है |
आखिरकार सवाल यह है कि - कैसे सुरक्षित रह पाएगी महिलाओं की बेकल , बेताब जिंदगी ? महिलाओं की स्वतंत्रता की फ़ुरकत उफान भर रहा है अफगानिस्तान में | तालिबानियों का जड़ से सफाया निहायत जरुरी है , आज के लिए भी और आने वाले कल के लिए भी | काश ! कि पंजिशिर के नागरिको के हाथ में मंत्रीमंडल व सत्ता की जिम्मेदारी होती , तो किसी की हिम्मत नहीं होती देश पर हमला बोलने का | मगर यह देश का दुर्भाग्य कहा जा सकता है कि - जिन्हें रक्षक बनाये गए वहीं भक्षक बन बैठे और लूटा दिया पूरा देश , जैसे कि उनकी हीं जागीर थी |
तड़प महिला की जारी है , इसे और भी ज्यादा गहरा करना उचित नहीं ! नहीं तो यह सैलाब उमरकर दुनियां को मिटा देगा | एक जननी की स्वतंत्रता पर अंकुश उचित नहीं | यह सभी को ध्यान में रखना चाहिए कि अगर धरती पर किसी का जन्म होता है तो माध्यम एक माँ होती है और ऐसी माँ को पता चले कि - वह एक आस्तीन के सांप को जन्म दे रही है , तो क्या दुनियां में भूचाल नहीं आ जायेगा ? इस सवाल को सिर्फ सवाल बनकर अब नहीं रहना है | इसपर पूरी दुनियां को गौर करना हीं पड़ेगा , सामान्य से लेकर खास तक को और समय से पहले | एक अहम बातें यह कि - इस खास बात से सभी वाकिफ है कि कभी कभी हाथी को भी एक अदना सी चीटी से भी हार मान जाना पड़ता है | ताकत तो सब मे होता है , सिर्फ हिम्मत जुटा देने भर की जरुरत है | ..... ( न्यूज़ / फीचर :- आदित्या , एम० नूपुर की कलम से )

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