Krishn Janmashtami 2021 | श्री कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व , जन्म का उद्देश्य व लीला | Bhavyashri News
- by Admin (News)
- Aug 30, 2021
कृष्ण जन्माष्टमी हिन्दुओं का सबसे बड़ा पर्व व त्योहार में से एक है | भाद्रमास में कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि व रोहिणी नक्षत्र में भगवान विष्णु के 8 वें अवतार का जन्म , भारत की धरती मथुरा में रात्री 12 बजे हुआ था | ये माँ देवकी और पिता वासुदेव के आठवें संतान हुए |
यह महापर्व विभिन्न जगहों पर विभिन्न नाम से मनाया जाता है | हर वर्ष यह कृष्णपक्ष की भादो महीने में रक्षाबंधन के कुछ हीं दिनों के बाद आता है | निशिताकाल के दौरान वैदिक समय के अनुसार मध्य रात्री में भगवान श्री कृष्ण का पूजन किया जाता है | आज 30 अगस्त है , आज रात्री 11:59 बजे से यह मुहूर्त आरम्भ होकर 12 :44 मध्य रात्रि तक रहेगा |
भगवान विष्णु के आठवें अवतार मथुरा के राजा और माँ देवकी के सगे भाई कंस का संघार करने के लिए इस धरती पर अवतार लिया | माँ देवकी और वासुदेव ने इन्हें जन्म दिया , परन्तु कुछ हीं समय के बाद वे यशोदा के आँचल में डाल दिए गए | इसलिए माँ यशोदा और नन्द के पालने में ये पले और बड़े हुए |
सच्चे मन से इनकी आराधना , पूजन करने से लोगों को समृद्धि और स्वस्थ जीवन का आशीर्वाद मिलता है | जीवन सुखी और बाधाओं का विनाश होता है | आज के दिन मथुरा और वृन्दावन में मंदिरों को भव्य रूप से सजाया और उनके गुणों का बखान किया जाता है |
इनकी गुणों में एक गुण "माखन" है | बचपन से हीं ये माखन खाया करते है | इसी उद्देश्य से खासकर भारत में जितने भी बच्चें हैं , उनके माता - पिता अपने बच्चों को माखन जरुर खिलाते है |
गोवर्धन पर्वत की कहानी से दुनियां वाकिफ है , खासकर भारत के लोग | क्यूंकि गोवर्धन पर्वत भारत में है और श्री कृष्ण का जन्म भी भारत में हीं हुआ है | इसलिए भारत को पवित्र धरती माना गया है | यहाँ बहुत सारे देवी - देवताओं की कहानी इसी धरती पर शुरू हुई और इसी धरती पार आज भी उतनी हीं सुन्दरता से जारी है | आज की तारीख में बता दे कि - पुलस्त्य ऋषि के श्राप के कारण गोवर्धन पर्वत प्रतिदिन एक मुट्ठी कम होता जा रहा है | अब सोंचने की बात है कि यह पर्वत 5 हजार साल पहले 30 हजार मीटर ऊँचा हुआ करता था | परन्तु अब वह उंचाई नहीं है , प्रतिदिन उंचाई घटती हीं जा रही है | बहुत कम लोग जानते है कि यह महापर्वत दो राज्य से जुड़ा है | 7 किलोमीटर तक ये राजस्थान के धरती से जुड़े है और बाकी उत्तरप्रदेश से | जीवन में इस पर्वत का एक बार परिक्रमा अवश्य हीं करनी चाहिए | इसलिए कि भगवान ने स्वयं इस पर्वत को स्पर्श किया है | यह वहीं पर्वत है , जिसे भगवान् श्री कृष्ण ने अपनी एक उंगली पर उठा लिया था और लोगो की जान बचाई थी |
यह पर्वत करीब 21 किलोमीटर की है | जिसकी परिक्रमा श्री कृष्ण को मानने वाले श्रद्धा से करते है | इसका आरम्भ दानघाटी मंदिर से शुरू होता है | रास्ते में कई प्राचीन और धार्मिक स्थल का नजारा भी देखने को मिलता है , जहाँ से श्री कृष्ण ने अपनी एक उंगली पर इस पर्वत को उठा लिया था | इसी पर्वत को भगवान की लीला स्थली भी कहा जाता है | द्वापर युग में ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए भगवान ने इसे उठाया था |
हर जगह श्री कृष्ण का रूप - स्वरप देखा जा सकता है | आज संध्या के समय के बाद से हीं श्री कृष्ण की प्रतिमा को झूले में डालकर उसे झुलाया जाता है | यह ठीक उत्सव जैसा मनाया जाता है , जैसे कि वाकई में एक बच्चे का घर में जन्म हुआ हो | भजन - कीर्तन के साथ वहां का वातावरण सुंगंधित फूलों के साथ बिखेरा जाता है | दिन भर लोग कुछ न कुछ फलहार , दूध , दही , माखन , लड्डू , मेवा व फल आदि चढ़ाते है और दिनभर बच्चों को बांटते खाते व खिलाते है | परन्तु संध्या के समय के बाद से लोग कुछ नहीं खाते और उनके जन्म की कामना में लीन रहते है | भगवान के जन्म के लिए गीत भजन गाते है , नए कपड़े पहनते है और भगवान पर नए कपडे चढ़ाते है |
आज के दिन मंदिर में भीड़ लगी रहती है | खासकर माखन उन्हें चढ़ाया जाता है | ऐसा माना जाता है कि - जो लोग भी श्री कृष्ण को याद करते है , तो कृष्ण वहां किसी न किसी रूप में प्रगट जरुर होते है | आज के दिन मांगी गई हर मुरादें पूरी होती है | भगवान विष्णु का यह आठवां अवतार बड़ा हीं चमत्कारी है | ये विघ्नविनाश और दुशमनों का संघार करने वाले प्रतिक माने गए हैं |
इन्हें प्रेम का प्रतिक भी माना गया है | इनकी पूजा करने वालो को जीवन में प्रेम की कमी नहीं होती | लेकिन वहीं कहानियों में ऐसा देखा गया है कि - इनसे प्रेम करने वाले विछोह का भी दर्द सहा है | परन्तु सुख , समृद्धि से परिपूर्ण इन्हें मानने वाले लोग होते है |
उड़ीसा में ऐसा देखा जाता है कि श्री कृष्ण के मंदिर में लोग इतना मशगुल होकर नाच करते है और भगवान को प्रसन्न करते हैं | वहां सभी लोग प्रतिदिन संध्या पूजन के समय एतिहासिक कपड़े में भजन - कीर्तन व अद्भुत नाच करते कृष्ण की प्रतिमा के सामने दिखाई पड़ते हैं | माना जाता है कि - जो लोग भी एतिहासिक रूप में नाचते व श्रीकृष्ण को याद करते हैं , तो श्रीकृष्ण उनके बीच उपस्थित होते है | हर इंसान की अलग - अलग सोंच और पूजा भाव भक्ति करने का अपना अलग हीं अंदाज है | कुछ भी किया जाए , परन्तु आत्मा से किया जाए , यहीं पर तो परमात्मा का निवास होता है और परमात्मा के हीं एक स्वरुप का नाम है श्री कृष्ण |
ये माँ देवकी के आठवें संतान हुए और माँ देवकी कंस की बहन थी | कंस एक अत्याचारी राजा था | शादी के बाद इनकी विदाई भी हो न सकी और कंस को एक आकशवाणी सुनाई पड़ी कि - देवकी के आठवें पुत्र के द्वारा कंस मारा जाएगा | अपनी जिंदगी की रक्षा के लिए उन्होंने अपनी बहन देवकी और बहनोई वासुदेव को मथुरा के कारागार में हीं डाल दिया | इसलिए श्री कृष्ण का जन्म कारागार में हीं हुआ |
देवकी के सात बच्चों को जन्म लेते हीं कंस ने मार डाला | परन्तु आठवां जन्म श्री कृष्ण का जैसे हीं हुआ , महिमा ऐसी निराली कि कंस के डर से वासुदेव ने रात में यमुना पार यशोदा मैया के आँचल में डाल दिया और आकाशवाणी के द्वारा माँ देवकी के गोद में एक लड़की थी , जिसे कंस ने जैसे हीं मारने की कोशिश की वह उनके हाथ से बहुत दूर जाकर एक भव्य माता के रूप में दिखाई पड़ी ,जिसे माँ दुर्गा का रूप कहा जा सकता है , यह एक अद्दभुत चमत्कार था , जिनकी वाणी कंस को कभी चैन से सोने नहीं दिया , जिससे कंस को कुछ भी पता नहीं चला कि आखिरकार आठवां अवतार कहाँ गया ? क्यूंकि होनी तो होकर रहता है , आकशवाणी गलत साबित नहीं हो सकता | मुर्ख कंस इस बात को झुठलाने के लिए अपनी बहन के सात संतान को मार डाला | परन्तु आठवें में तो भगवान को इस धरती पर आना था , इसलिए यह चमत्कार हुआ |
श्री कृष्ण के बाल लीलाओं से तो सभी वाकिफ है और आम बच्चों में भी लोग श्री कृष्ण का रूप देखते है , जब बच्चे छोटे होते है | भगवान का गौ चारण लीला , गोवर्धन लीला , रास लीला , राधा के साथ अधिकांशतः वक्त गुजारना से सभी वाकिफ है | जब यह बड़े हुए तो मथुरा में आकर अपने मामा कंस का वध किया , उसके बाद सौराष्ट्र में द्वारिका नगरी की स्थापना की गई | उसे एक राज्य बनाया गया , जहाँ के ये राजा बने | श्री कृष्ण को कन्हैया , गोपाल , केशव , श्याम , द्वारकेश , द्वारिकाधीश , वासूदेव व मोहन नाम से भी लोग जानते है |
लोग कहते है - कलयुग आ गया | यह कलयुग राजा परीक्षित , जो अभिमन्यु और उत्तरा के पुत्र और अर्जुन के पौत्र थे , उसी समय से कलयुग का आरम्भ हुआ | श्री कृष्ण का निवास स्थान वृन्दावन , द्वारिका , गोकुल और बैकुंठ के साथ हीं हर मानव का ह्रदय भी कहा जा सकता है | युद्ध की बात किया जाए तो - कुरुक्षेत्र युद्ध है | भाई - बहन में बलराम और सुभद्रा | जीवन साथी के रूप में तो सभी जानते है कि माँ रुकमिनी से इनका विवाह हुआ है , परन्तु इनके साथ कुछ नाम और भी जुड़े हुए है , जिसमे - राधा , सत्यभामा , लक्षणा ,नग्नजित्ति , जांबवत्ति , कालिंदी , भद्रा है | अस्त्र में सुदर्शन चक्र उनके मुख्य अस्त्र है | खासकर होली और जन्माष्टमी में उत्सव मनाया जाता है | हिन्दू धर्म के लोग अपने घर में भगवत गीता जरुर हीं रखते है |
भारत सहित यह त्यौहार नेपाल , अमेरिका , मोरिसस आदि में काफी धूम धाम से मनाया जाता है |
चलते - चलते एक अहम बात हम और भी बता दे कि - जब श्री कृष्ण शादी के बाद कुछ दिन के लिए बाहर जाने को थे , तो उन्होंने माँ रुकमिनी से कहा था - जब भी मेरी याद आये तो इस पेड़ को याद कर लेना , मै यहीं पर मिलूँगा | उस पेड़ का नाम है - हरश्रृंगार इस पेड़ को लोग पारिजात के नाम से भी जानते है | यह पेड़ भगवान श्री कृष्ण का प्रतिक माना जाता है , यहाँ भी इनका निवास स्थान है | यह फूल खुशबुओं से भरा होता है और यह बहुत हीं कोमल व स्वयं डाल से झड़ जाने वाला है |
तो आज जन्माष्टमी है | ढेरों शुभकामनाओं के साथ अपने घर में श्री कृष्ण के आगमन के लिए एक दीप जरुर जलाए , जिससे की आपके जीवन में सुख समृद्धि व रौशनी भरा रहे और दुश्मनों का सदैव विनाश होता रहे | राधे .. राधे | अध्यात्म फीचर :- आदित्या , एम० नूपुर की कलम से
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