5 पट्रोलियम उत्पादों को GST से बाहर क्यूँ रखा जाता है ! पेट्रोल - डीजल को GST दायरे मे लाने से क्या होगा ? "भूचाल" Bhavyashri News
- by Admin (News)
- Sep 29, 2021
पेट्रोल - डीजल पर बढ़ता हुआ दाम , लोगों का कमर तोड़ता हुआ जान पड़ रहा है और इससे मुंह मोड़ना असंभव सा है ! इसलिए कि भारत के आबादी के अनुसार 75% से ज्यादा लोग पेट्रोल - डीजल , एविएशन टर्बाइन फ्यूल , नेचुरल गैस और क्रूड ऑयल इस्तेमाल करते हैं |
GST काउंसलिंग की 45 वां बैठक में , जो हाल हीं में किया गया | इसमे पेट्रोल और डीजल दोनों को GST के दायरे में लाने के आसार नजर आ रहे थे | परन्तु यह इन्तजार पुकार हीं बनकर रह गया | कुछ राज्य की तरफ से पेट्रोल और डीजल को GST के दायरे में लाने पर विरोध किया गया था |
अगर हम भारत की राजधानी दिल्ली की बात करे तो , उदहारण स्वरुप इसका विस्तार हम आप तक पहुंचाए तो - पिछले चार दिनों में इन दोनों के दर में इजाफा होता रहा है | भारत के चार महानगर का दर बता दे तो -
दिल्ली में :- पेट्रोल - 101.19 रुपये प्रति लीटर , डीजल - 88.32 रुपये प्रति लीटर
मुंबई में :- पेट्रोल - 107.26 रुपये प्रति लीटर , डीजल - 96.41 रुपये प्रति लीटर
कोलकाता में :- पेट्रोल - 101.62 रुपये प्रति लीटर , डीजल - 92.42 रुपये प्रति लीटर
चेन्नई में :- पेट्रोल - 98.96 रुपये प्रति लीटर , डीजल - 93.93 रुपये प्रति लीटर
अब ये तो रही डीजल - पेट्रोल के दर का आंकड़ा | अभी जो लखनऊ में 45 वां काउन्सिलिंग की बैठक में यह बात उठी कि - इन सभी को GST के दायरे में लाया जाए | परन्तु केरल के वित्त मंत्री K.N. बाला गोपाल ने कहा कि - अगर पेट्रोल और डीजल GST के दायरे में लाया गया तो राज्य उसका पुरजोर विरोध करेगा | वहीं महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री - अजित पवार , जो वित्त मंत्रालय भी संभालते है , ये भी विरोध करते हुए कहा कि - केंद्र को इंधन पर लगाये गए करो को कम करना चाहिए !
GST की यह बैठक निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में लखनऊ में आरम्भ किया गया | जिसमे अन्य चीजों को GST के दायरे में लाया गया | परन्तु पेट्रोल - डीजल , प्राकृतिक गैस और एविएशन टर्बाइन फ्यूल ( जो विमान में भरा जाता है ) इन सबको GST दायरे में लाने हेतु प्रयास किया जा रहा था | परन्तु राज्य सरकार के द्वारा विरोध के कारण इस सोंच को अधुरा छोड़ दिया गया |
जबकि गौर करने वाली बात है कि - जून माह में केरल हाई कोर्ट ने एक याचिका पर GST काउन्सिलिंग को यह निर्देश जारी किया था कि - इंधन को GST के दायरे में लाने के लिए निर्णय ले , बावजूद इस पर गौर नहीं किया गया | अगर इसे GST के दायरे में लाया जाता तो , पेट्रोल सोंच से भी ज्यादा सस्ता होकर लोगों के चेहरे पर रंगीन मुस्कुराहट भर सकती थी | परन्तु ऐसा नहीं होगा , क्यूंकि पेट्रोल पर प्रति लीटर केंद्र सरकार 32% टैक्स लेती है और राज्य सरकार 23.7% | किसी राज्य में थोड़ा ज्यादा और कम का अंतर हो सकता है | वहीं डीजल की बात करे तो केंद्र सरकार 35% तो राज्य सरकार 14% से ज्यादा टैक्स वसूलती है |
2019 - 2020 में पेट्रोलियम पदार्थ से राज्य सरकार व केंद्र सरकार को 5.55 लाख करोड़ का फायदा हुआ है | इसलिए GST सिस्टम में अगर किसी भी तरह का परिवर्तन करना है , तो उसमे पैनल की तीन चौथाई लोगों से अप्रूवल की आवश्यकता पड़ती है | जिस पैनल में सभी राज्यों और केंद्र प्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं |
इंधन राजस्व जुटाने का एक अहम जरिया है , जिसे राज्य सरकार किसी भी तरह खोना नहीं चाहेगी |
1 जुलाई 2017 को भारत में GST लागू किया गया , तो उसी समय से इन पाँच पेट्रोलियम उत्पादों को GST के दायरे से अलग रखा गया था | इस पर सेन्ट्रल बोर्ड एक्साइज के आलावा राज्यों की तरफ से वैट भी लगाया जाता है |
अभी दिल्ली में पेट्रोल पर 55% टैक्स लगता है | अगर ये GST के दायरे में आया , तो इसकी कीमत आधी हो जायेगी | परन्तु राज्य सरकार जनता के लिए त्याग नहीं कर सकती | बोलने के लिए तो सभी बोल देते हैं , परन्तु किसी भी कीमत पर , कितनी भी कोशिश क्यूँ न लगा ली जाये - बातें और प्रस्ताव वहीं के वहीं धरी रह जायेगी | क्यूंकि अधिकांशतः फायदा सरकार के पास पहुंचता है , तो कोई भी सरकार अपने फायदे सी वंचित रहना क्यूँ पसंद करेगी !
ये पांचों इंधन एक तरह से सरकार के लिए सोने की चिड़िया कहा जा सकता है |
अगर केंद्र सरकार चाहे तो एक्साइज ड्यूटी को हटाकर पेट्रोल को सस्ता कर सकती है | अब आंक लीजिये - एक व्यक्ति अगर 40 रुपया भी कम दे रहा है तो समझा जा सकता है कि - एक दिन में करोड़ों लोग न जाने कितने लीटर पेट्रोल अपनी गाड़ी में इस्तेमाल करते हैं | आप इसे समझ सकते है और इसके बिना किसी का काम नहीं चल सकता | यह राज्य की आबादी के अनुसार यह प्रतिदिन खपत होने वाला इंधन है | प्रतिदिन करोड़ों रुपया राज्य के पास पहुँच रहा है , तो इसे वृहित राजस्व माना जाएगा और इस फंड को भला कौन समाप्त करना चाहेगा !
इसलिए लोग कितना भी चाह ले यह इंधन की कीमत वहीं के वहीं रुका रहेगा | यह अलग बात है कि 10 - 20 पैसे या 1 रुपया भी लीटर में सस्ता हो जाए तो यह एक आदमी के लिए सस्ता नहीं माना जाएगा | यह लीटर पर 35 - 40 - 50 रुपये सस्ता हो जाए , तो लोगों को राहत मिल सकता है | एक रुपये बढ़ जाने से सरकार के पास एक दिन में करोड़ों का फंड जमा होता है | परन्तु आदमी के लिए लीटर में 1 रुपया सस्ता होने का क्या मतलब है ? यह तो यहीं बात हुई कि - किसी रोते हुए बच्चे को आईने में चाँद दिखला दिया जाना | ........ ( न्यूज़ / फीचर :- भव्याश्री डेस्क )

रिपोर्टर
Admin (News)