हेरोइन के व्यापर में भारतीय नागरिक को सिंगापुर में फांसी की सजा , राष्ट्रपति ने ख़ारिज किया याचिका Bhavyashri News
- by Admin (News)
- Nov 12, 2021
सिंगापुर के कानून के अनुसार 15 ग्राम से ज्यादा की हिरोइन के साथ अगर कोई सख्स पकड़ा जाता है , तो इसे संगीन अपराध की धारा में निर्धारित कर उन्हें बतौर फांसी के फंदे तक पहुंचाती है |
2009 में नागेन्द्र नामक व्यक्ति के साथ ऐसा हीं हुआ | नागेन्द्र का पूरा नाम नागेन्द्र धर्मालिंगम है , जो अभी सिंगापुर की चांगी जेल में कैद है | यह बात 2009 की है , उस वक्त नागेन्द्र की उम्र मात्र 21 साल थी | नागेन्द्र को मलेशिया से सिंगापुर घुसते हुए पकड़ा गया था | संदेह के तौर पर जब उनकी सर्चिंग हुई तो उनकी जाँच में 43 ग्राम हिरोइन बंधी थी | नागेन्द्र धर्मालिंगम एक भारतीय नागरिक है |
नागेन्द्र की उम्र अभी 33 वर्ष है और वह सिंगापुर जेल में हर दिन फांसी के भयावह भय से मृत्युदंड पाकर पल - पल स्वयं को मरता हुआ मससूस कर रहे हैं | ऐसा इसलिए कि ड्रग्स के मामले में सिंगापुर में दुनियां का सबसे कठोर कानून बनाया गया है , जिसमे स्थानीय स्तर पर फांसी के सजा पर कोई बड़ा विवाद का सवाल हीं नहीं उठता | इसलिए वहां ड्रग्स के कारोबार और इस्तेमाल से पूर्व लोगों को सोंचना पड़ता है कि कहीं वह ड्रग्स को लेकर अपनी जिंदगी को खतरे के अधीन तो नहीं कर रहे |
बीते बुधवार की सुबह नागेन्द्र को फांसी पर चढ़ाया जाना था , परंन्तु आखिरी वक्त में समय ने उनका साथ दिया या कहे कि - लाखों लोगों की दुआएं काम आई , जिससे की इनका फांसी अचानक टल गया | कहा गया है समय के हारे हार है और समय के जीते जीत | समय जब साथ देता है तो पतझड़ भरे जीवन में भी इन्द्रधनुषी पहर आँखों के सामने तैरते नजर आते है और सूखे पते शबनम से भरी गुलाब की पंखुड़ी जैसी महसूस होती है |
बीते मंगलवार को उनकी Covid जांच की गई , तो उनके संक्रमित होने की पुष्टि हुई | इसी कारण ने फांसी को टाल दिया | इसे समय का तकाजा कहा जा सकता है , जिससे कि Covid संक्रमण ने उनके लिए एक सुखद संकेत छोड़ा | यूँ तो लोग Covid संक्रमित होने के संदेह से हीं भयभीत हो जाते है | परन्तु एक कैदी के लिए जिसके जिंदगी के कुछ घंटे बाकी हो , यह सन्देश उन्हें लम्बी उम्र दे गया |
नागेन्द्र को फांसी न मिले इसपर एक जोरदार आन्दोलन ने भी बेरुखी प्रगट की | यहाँ तक की अंतर्राष्ट्रीय कानून ने भी इनका साथ दिया और कहा कि - मानसिक रूप से कमजोर लोगों को फांसी देने पर प्रतिबन्ध है | यह महसूस करने की बात है कि - अब तक 60 हजार से ज्यादा लोगों ने इनकी सजा माफ़ करने वाली याचिका पर अपनी हस्ताक्षर कर सिंगापुर के राष्ट्रपति से नागेन्द्र की सजा माफ़ कर देने की अपील की है |
फांसी की सजा सुनकर कुछ लोगों का कहना है कि - नागेन्द्र की सजा कितनों के दिलों को कमजोर कर रही है और मन को झकझोर कर रख दिया है | अहिंसक अपराध के तहत एक जरा सी चुक पर एक व्यक्ति को फांसी पर चढ़ा देना न्याय नहीं | सोशल मीडिया पर भी इस अभियान को भरपूर समर्थन मिल रहा है | हर किसी की जुबान यहीं सन्देश छोड़ रहा है कि - नागेन्द्र की सजा माफ़ कर दी जाए |
अभी 2021 के नवम्बर में हम दूसरी सप्ताह में प्रवेश कर चुके है , जबकि यह मामला 2009 का है | 2015 , 17 की बात करे तो नागेन्द्र ने अपनी मानसिक सेहत के आधार पर फांसी की सजा माफ़ करने की अपील की थी | चिकित्सकों ने भी उनकी मानसिक विकलांगता का रिपोर्ट कोर्ट को सौंपा था | जबकि यह बात पुनः उभरकर सामने आयी की चिकित्सकों के रिपोर्ट में हीं कहीं न कहीं उलट फेर किया गया , जिससे की नागेन्द्र की सजा निर्धारित तारीख तक पहुँच गई |
सूचना के आधार पर , 3 अतिरिक्त मनोवैज्ञानिक ने आदालत से यह कहा था कि - नागेन्द्र को किसी भी तरह की मानसिक बीमारी नहीं है | इसी तथ्य के आधार पर यह साबित हुआ कि नागेन्द्र की मानसिक स्थिति न खराब है और न कमजोर | इसे एक मजबूत आधार मानते हुए बीते साल राष्ट्रपति ने भी उनकी दया याचिका को ख़ारिज कर दिया था | इस बात को लेकर अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने भी आदालत की आलोचना कर दी | इस बात से समझा जा सकता है कि - नागेन्द्र को फांसी न मिले , कितने सारे मजबूत कदम अपनी सोंच की हथियार लेकर कदम बढ़ाया है |
यहाँ तक की मलेशिया के प्रधानमंत्री इस्लाइल याकूब साबरी ने भी सिंगापुर के प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत तौर पर नागेन्द्र को माफ़ कर देने की अपील की थी , परन्तु सब के सब अपील धरे के धरे रह गए , सिंगापुर कोर्ट और सरकार के बीच | इसपर मलेशिया के लोगों ने अपना आक्रोश जाहिर कर दिया और अपने समर्थन में प्रदर्शन भी |
हम बात कर ले नागेन्द्र धर्मालिंगन की बहन शर्मीला धर्मालिंगम कि जो अपने भाई के लिए वर्षों से दुआएं मांग रही है और उनकी दुआ का असर साफ़ दिखाई पड़ रहा है कि किसी न किसी बहाने वर्षों से फांसी की सजा का बंधन एक कारण लगकर संदुकची में बंद पड़ जाता है |
शर्मीला को सिंगापूर जेल से एक पत्र प्राप्त हुआ था , जो एक बहन का दिल दहला गया | उसमे लिखा था कि - 10 नवम्बर को नागेन्द्र को फांसी पर चढ़ा दिया जायेगा | इस बात को लेकर शर्मीला बहुत परेशान थी और उनका मन इस बात को स्वीकार नहीं कर रहा था | जिसे कुदरत ने भी नकार दिया | एक बहन की भावना की जीत तो हो गई , परन्तु मुहब्बत कितना असर व रंग लाता है ? यह तो आनेवाला कल हीं बताएगा |
शर्मीला का प्रार्थना हर दिन समय की शक्ति के पास पहुंचता है | इस प्रार्थना का चमत्कार है कि अभी उनका भाई नागेन्द्र जिन्दा है | 10 वर्षों से टल रहा फांसी की सजा आखिरकार शर्मीला की प्रार्थना से कब तक लड़ पायेगा ?
एक जरा सी चुक इंसान को कहाँ से कहाँ तक पहुंचा जाता है ? कहा गया है - झूठ की धरातल पर इमारतें नहीं बनाई जाती | नागेन्द्र की यह झूठ सिंगापूर आदालत में मौजूद है | जब नागेन्द्र ने अपने ब्यान में कहा था कि - उन्हें हिरोइन के साथ सीमा पार करने के लिए मजबूर किया गया था | यह दर्ज बातें पुनः नागेन्द्र ने पलट दी और इसके बदले फिर कहा कि - पैसों की जरुरत थी जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने अपराध का सहारा लिया |
सिंगापुर के आदालत ने नागेन्द्र के बचाव में बोले गए झूठे तर्क पेश करने को लेकर फांसी की सजा सुनाई थी | सिंगापुर सरकार ने अपना तर्क पेश किया और कहा कि - नागेन्द्र को अच्छे और बुरे की समझ थी और इस तरह सिंगापुर आदालत को झूठे तर्क रास नहीं आया और फांसी की सजा मुकर्रर कर दी गई |
हेरोइन का व्यापार गैर क़ानूनी माना गया है , फिर भी लोग इस जुर्म से वंचित नहीं | इसके आदान - प्रदान में लगे करोड़ों / अरबों के मुनाफे के लिए कदम आगे बढ़ाते है , बच गए तो दलदल में फंसते हुए चले जाते है , निकल गए तो स्वयं को हिरोइन के व्यापार में हीरो करार देते है |
यह अलग बात है कि आज नागेन्द्र धर्मालिंगन के लिए लोग सहानुभूति भरी दुआ याचना करने में लगे है | परन्तु गौर करने की बात है कि - कानून का उलंघन करना या गलत रास्ते पर कदम बढ़ाना कितना उचित था ! पैसे कमाने के लिए हजारों रास्ते बने है जिससे सुनहरा मंजिल को पाया जा सकता है , खैर ..... | ..... ( न्यूज़ / फीचर :- भव्याश्री डेस्क )

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