केरल में एक महिला ने पुरुष पर तेज़ाब डाला , दोनों की फेसबुक पर हुई थी दोस्ती | Bhavyashri News
- by Admin (News)
- Nov 29, 2021
शिक्षा से अपराध को रोकना कितना संभव ? मेरे ख्याल से शिक्षा के साथ जागरूकता भी जरुरी है | सिर्फ किताबी ज्ञान जिसमे रटंत विद्या भी बरकरार हो , परन्तु अपनी संस्कृति का ज्ञान व सभ्यता का परिचय न हो , तो वहां विद्या किस काम का ! जहाँ जिंदगी को जानवर बना दिया जाए |
केरल के इडुक्के शहर में शादी से इंकार करने वाले एक पुरुष पर एक 35 वर्षीय महिला ने तेज़ाब डाल दिया , जिससे उनकी आँख की रौशनी चली गई और चेहरा भी बुरी तरह झुलस गया | वे अभी भी अस्पताल में अपना इलाज करा रहे हैं | तेज़ाब डालते वक्त महिला भी थोड़ी बहुत जख्मी हुई और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया |
फेसबुक पर इन दोनों की दोस्ती हुई थी , जिसमे दोनों विवाह करने तक बात बढ़ा ली थी | लेकिन लड़का को जब पता चला कि यह एक तलाकशुदा महिला है और इसके 2 बच्चे भी है , तो उन्होंने शादी से इंकार कर दिया |
महिला का नाम शिवा है , उम्र 35 वर्ष और लड़के का नाम अरुण कुमार जिनकी उम्र 27 साल है | फेसबुक पर यह मुलाक़ात जिससे सिर्फ दोस्ती , दगाबाजी शर्मसार नहीं हुआ बल्कि यह विश्वास की धज्जियाँ भी उड़ा बैठा |
पुलिस ने कहा कि - अरुण ने महिला से विवाह करने का वादा किया था | परन्तु जब उसे पता चला कि शिवा की पूर्व में शादी हो चुकी है और उसके 2 बच्चे भी है , तो अरुण ने शादी करने से इंकार कर दिया | शिवा ने गलती की जो अरुण को पहले जानकारी नहीं दी कि वह तलाकशुदा और 2 बच्चे की माँ है | हो सकता है कि - अरुण को पहले जानकारी मिलती तो या तो वह पीछे हट जाते नहीं तो महिला के प्रति उनकी सहानुभूति बढ़ जाती | परन्तु ऐसा नहीं हुआ | अरुण को बाद में पता चला और अरुण के शादी से इंकार करने पर शिवा ने आक्रोशित होते हुए जघन्य अपराध को अंजाम दिया |
सुना गया है कि प्यार का दूसरा नाम त्याग भी है , जो शिवा में नहीं देखा गया और यह भी सही है कि - झूठ के बल पर जिंदगी गुजारी नहीं जा सकती | शादी से इंकार करने पर शिवा ने अरुण को ब्लैकमेल भी किया | पुलिस में केस दर्ज न करने को लेकर शिवा ने पैसे का भी डिमांड किया | जिस दिन शिवा ने अरुण पर तेज़ाब डाला उस दिन अरुण शिवा को पैसे हीं देने आया था | पानी पीने के लिए जैसे हीं मुड़ा कि शिवा ने उसपर तेज़ाब अटैक कर दिया |
अब सवाल है कि किसको क्या मिला ? शिवा ने तो अपनी दुनियां बसाई फिर उजड़ भी गया , कारण चाहे जो भी हो | इस घटना से अरुण अभी अस्पताल में दुःख की घड़ी काट रहा है | शायद अरुण का मन यहीं सोंच रहा होगा कि - प्यार करने वाला इतना क्रूर कैसे हो सकता है भला !
2018 में तेज़ाब से सम्बंधित 240 घटनाएं घटी | आंकड़ा अनुसार 57% घटना महिलाओं के खिलाफ घटी , वहीं 43% घटना पुरुषों के खिलाफ | ज्यादातर शिकार महिला होती है , मगर अब पुरुष भी शिकार हो रहे है | ऐसा नहीं की क्रूरता से पुरुष वंचित है , परन्तु पुरुष पर अत्याचार करने वाली घटना रौशनी तक जल्द नहीं पहुँच पाती | इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता और यह सच है कि - पुरुष पर हो रहे क्रूरता को लेकर लोग विश्वास हीं नहीं करते | यह बात सोंच से पड़े लगता है कि एक महिला का दिल इतना क्रूर हो सकता है ! मगर अब समाज को इस बात को मानना हीं पड़ेगा |
एसिड यानि की तेज़ाब जो किसी चीज को जलाने का काम करता है | इसका हमला शरीर को जलाने के साथ हीं अन्दर के पीड़ा को भी जागृत करता है | सुप्रीमकोर्ट ने एसिड की बिक्री पर अंकुश लगाया था , जिससे दूकान पर एसिड की बिक्री नहीं की जा सकती थी | कुछ विशेष दूकान के पास हीं वहां इजाजत है ,जहाँ खरीदार के विषय में पूरी जानकारी लेकर रिकॉर्ड रखा जाता है | सुप्रीमकोर्ट ने इसलिए गाइड लाइन बनाया , परन्तु फिर भी लोग चुकते नहीं और बंदिशों के बीच भी तेज़ाब खरीदना मुश्किल नहीं | देश के किसी भी राज्य में आज भी यह उपलब्ध है और वह भी आसान तरीके से |
परन्तु दुःख इस बात का है कि केरल जैसे साक्षर राज्य में यह घटना घटी जहाँ 100 में 96% लोग पढ़े - लिखे है और यह रिकॉर्ड में दर्ज है | फिर भी यह दावे के साथ कहा जा सकता है कि - यहाँ के लोग भी जागरूक नहीं और न हीं ऐसे अपराध के लिए कोई अतिरिक्त कठोर सजा देने की धारा भी निहित की गई है | अपराध में जेंडर नहीं सिर्फ अपराधी को आंककर सजा तय की जानी चाहिए | इसके लिए समाज को आगे बढ़ना और बढ़ाना होगा , तभी हम कह सकेंगे - "हम बुलबुले है इसके ये गुलशिता हमारा , सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा" |
चलते - चलते बस हम इतना कहना चाहेंगे कि - प्यार तभी जिन्दा रह सकता है जब त्याग किया जाए और जहाँ त्याग हो वहां अपराध को अंशमात्र भी जगह नहीं मिलता | इसलिए यहीं भाषा अपनाकर क्यूँ न प्यार बाटते चलें ! ....... ( न्यूज़ / फीचर :- आदित्या , एम० नूपुर की कलम से )
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