दुबई के सलाल्हा बीच पर उठती हुई लहरों में महाराष्ट्र के एक ही परिवार के 3 सदस्य समा गए | Bhavyashri News
- by Admin (News)
- Jul 14, 2022
ईद की छुट्टी पर ओमान ट्रीप पर जाते हुए शशिकांत ने सोशल मीडिया पर तस्वीर डाला और छुट्टी मनाने पहुँच गए समुन्द्र की लहरों के बीच जहाँ उनकी पत्नी , 2 बच्चे सहित मित्रगण थे और यह ख़ुशी देखते हीं देखते मातम में बदली |
सभी लोग ओमान के सलाल्हा बीच पर उठती हुई लहरों के पास उसका सौन्दर्य देखने में मशगुल थे | उठती - थमती लहरों के बीच लोग सेल्फी ले रहे थे और ध्यान ही नहीं दिया कि एक बड़ी लहर आ रही है |
बड़ी लहर से शशिकांत के 2 बच्चे का बैलेंस बिगड़ गया और वे लहरों के वेग में घिसते चले जा रहे थे कि तभी उनके पिता ने उन्हें देखा और उन्हें बचाने के क्रम में लहरों के बीच छलांग लगा दी और तीनो बहते हुए समुन्द्र में विलीन हो गए |
विडियो देखने के लिए इस टाइटल पर क्लिक करे :-
इन तीनो की तलाश हेतु अभियान जारी किया गया | एक लड़की जिसकी उम्र 9 साल है और दूसरा लड़का है जिसकी उम्र 6 साल थी |
शशिकांत महाराष्ट्र के सांगली जिले के रहने वाले थे | एक हीं परिवार के 3 सदस्य का समुन्द्र में डूब जाने की स्थिति को देखकर महसूस किया जा सकता है कि - अभी उस परिवार का हाल क्या होगा ? बेचैनी के इस दौर में तो उनकी पत्नी अकेली रह गई |
यह ईद की छुट्टी इनकी जिंदगी को वीरान कर गया , न पति रहे न बच्चे जिसे महिला का धरोहर कहा जाता है |
घटना की जानकारी मिलते हीं शशिकांत के भाई दुबई के लिए रवाना हो चुके है |
शशिकांत महामने दुबई के एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते थे और अपनी पत्नी - बच्चो के साथ दुबई में ही रहते थे | सेल्फी लेने व डूबने का विडियो भी सामने आया जो दिल को दहला गया | एक पिता ने अपने डूबते हुए बच्चे को बचाने के लिए समुन्द्र में छलांग लगा दी , परन्तु समुन्द्र की तेज लहरों से उनकी वापसी नहीं हुई |
आज के दौर में लोग सेल्फी लेने में इतना मशगुल हो जाते है कि उन्हें पीछे या सामने से आती हुई कोई भी चीजो पर ध्यान नहीं जाता | उनका ध्यान सिर्फ खूबसूरती को अपने मोबाइल में कैद करने की तरफ केन्द्रित रहता है | ऐसे में उन्हें यह भी पता नहीं चला कि वे समुन्द्र के किस पड़ाव पर खड़े है जहाँ समुन्द्र की तेज रफ़्तार का आवागमन कभी भी हो सकता है | जरुरी नहीं कि जहाँ पर हम खड़े हैं और उनका वेग जिस तेजी से या धीमी गति से आता हो वह वहीं पर बंधा रहे | ऐसे में उन बच्चो का ध्यान ही नहीं गया कि वे खिंचा भी सकते है |
साथ ही इस दुःख भरी घटना को महसूस कर हम इतना कहना चाहेंगे कि - बच्चे तो बच्चे है उन्हें वेग का दौर मालुम नहीं | परन्तु बड़े का यह फ़र्ज़ बनता है कि बच्चे को बच्चा समझकर अपने पास में रखे और उनपर ध्यान दे , खासकर वैसे जगह पर जहाँ खतरा कभी भी आमंत्रण दे सकता है | बच्चे साथ होते तो लहर उन्हें खींचता नहीं , दूसरी बात शशिकांत जी को उन्हें बचाने जाना नहीं पड़ता | क्यूंकि कोई भी पिता अपने डूबते हुए बच्चे को यूँ ही छोड़ नहीं सकता और इसी छोटी सी नादानी में एक हीं परिवार के 3 सदस्यों की जान लहरों में समा गया |
ध्यान दीजिये समुन्द्र का सौन्दर्य देखने जब भी जाए तो अपने बच्चो को पास में रखे और दूर से मजा ले , तभी यह मजा जिंदगी में दूबारा भी बुलाएगा आपको | .......... ( न्यूज़ / फीचर :- रुपेश आदित्या , एम० नूपुर की कलम से )

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