जहाँ से आये थे फिर वहीं लौट रहे लोग , कोरोना महामारी में जिंदगी का ठहराव विलुप्त
- by Admin (News)
- Apr 10, 2021
2020 भी अजीब था और 2021 भी अपना रंग दिखलाना आरंभ कर दिया | उस दौड़ में भी मजदूर वर्ग के लोग मुंबई से पलायन कर गए और आज भी 2021 के आरंभ में पलायन करते नजर आ रहे है | उनके लिए ठहराव कहीं नहीं , कैसा वक्त दिखा रहा प्रकृति कि शरीर मशीन बन गया भागते भागते |
महाराष्ट्र में 5 अप्रैल से नए नियम व पाबंदियां लगाई गई है | ऐसे में मजदूर वर्ग याद कर रहे हैं पिछला सीजन , कोरोना महामारी के लॉकडाउन का | उस वक्त अचानक लॉकडाउन का होना और 2000 से ज्यादा किलो मीटर पैदल यात्रा वाली हकीकत फिल्म , आँखों से गुजरता जा रहा है | लोग इस स्थिति में सोंचने पर मजबूर हुए जा रहे - क्या करें , क्या न करें और इस भयावह स्थिति से रौगटे खड़े हो रहे है अब ! क्या होगा हाल अपना ? बेहाल हुए ये अपना कदम अपनी गावं की तरफ ही बढ़ाना उचित समझ रहे है कि आज तो ट्रेन चल रही है कल का क्या ठिकाना , ट्रेन चले न चले !
इस बात पर पैनी दृष्टि डालते हुए भारी संख्या में मजदूरों का पलायन जारी है | अधिकांशतः मजदुर जो उत्तरप्रदेश , बिहार , झारखण्ड आदि से आये थे वे फिर वापस लौटने लगे है | मुंबई के रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भारी भीड़ देखी जा रही है , ऐसे में देख कर कहा जा सकता है कि Covid-19 की उड़ती धज्जियाँ सोंच का विषय है या आक्रोश का विषय है | लेकिन ! हर हाल में नुकसान तो देश का हीं होना है |
आज के दौड़ में सयंम बरतना निहायत जरुरी है , स्वयं के लिए , परिवार / समाज व देश के लिए | हर हाल में मास्क लगाना लोगों को नहीं भुलाना चाहिए | वहीं कहीं भी यात्रा करे , कसी भी परिस्थिति में करें सोशल डिस्टेंस जिंदगी को सुरक्षित बनायें रखने के लिए बहुत जरुरी है | कहीं ऐसा न हो कि छोटी सी गलती स्वयं पर हीं भारी पड़ जाए | सुरक्षित बढिए और सुरक्षित बढाइये देश को |
ऐसा न हो कि - "कोरोना को धुल में उड़ाते चले गए या कोरोना के नियम को धुल में उड़ाते चले गए" | कुछ भी हो सतर्कता जरुरी है | .... ( न्यूज़ :- भव्याश्री डेस्क )

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