आत्मविश्वास यानि चाहत की बुलंदी , धरती पर कुछ भी पाना असंभव नहीं |
- by Admin (News)
- Jun 15, 2021
आत्मविश्वास यानि कि अपनी शक्ति / योग्यता पर विश्वास , यकीन व आत्मानुभूति का होना | इसलिए की आत्मविश्वास एक शक्ति है , ताकत है , जिसे अपने अन्दर पैदा किया जा सकता है और बुलंदियों पर पहुंचकर सितारे तोड़े जा सकते है , अपनी जिंदगी में जड़ने के लिए , रंग बिखेरने के लिए | वहीं आत्मविश्वास एक अनमोल पॉवर भी है , जिसे ईश्वर से मिला एक उपहार कहा जा सकता है | जो आपके अन्दर के ज्ञान के भण्डार को समय - समय पर बाहर निकालकर , सामने वाले को पराजित कर विजयी होते हुए अपने कुल का नाम रौशन करते है | इसलिए आत्मविश्वास जैसे अमृत का दो घूंट कोई पी ले तो हर मुश्किल आसान बन जाएगा | दुनियां में कुछ भी असंभव नहीं , जिसे इंसान पा न सके , कर न सके और करा न सके |
फोटो डेली ट्रेंडिंग न्यूज़ YouTube चैनल के सौजन्य से
आज के दौर में जहाँ दुनियां इतनी आगे सफ़र कर रही है कि हम चाँद पर घर बसाने की सोंच रखते है | ऐसे में धरती पर कोई भी काम मुश्किल कैसे हो सकता है ? सिर्फ कदम बढ़ाने की जरुरत है | लेकिन कदम बढाने से पहले हीं हम हार मान लेते है | इसलिए कदम बढाने से पहले , अपने अन्दर आत्मविश्वास को भरना पड़ेगा |
आत्मविश्वास बाजार में नहीं मिलता कि जाकर ख़रीदा जा सके और अपने मन में , जिगर में भर ले | आत्मविश्वास तो अपने अन्दर की उपज है , हम जैसे चाहेंगे और जब चाहेंगे आत्मविश्वास पैदा कर कदम बढ़ा सकते है | लेकिन ऐसा नहीं होता और कुछ लोग वहीँ रुक जाते हैं | सोंचने पर मजबूर हो जाते है , स्वेयं को अक्षम मानते हुए - ईश्वरीय शक्ति या पूर्व जन्मों के कर्म को मानते हुए , अपने दिल को तसल्ली दे लेते है | सच कहा जाए तो - दुनियां में कोई इंसान अक्षम नहीं , जिसके अंग विक्षप्त है , शायद वो भी नहीं ! लेकिन कुछ लोग सक्षम होते हुए भी अक्षम बनकर हीं जिंदगी का खुबसूरत पलछिन जीना पसंद करते है |
कुछ इंसान के पास तो भरपूर आत्मविश्वास होता है और कुछ के पास अन्दर छुपा होता है , जिसे बाहर लाने व उजागर करने की जरुरत होती है | उदाहरण स्वरुप यह कहा जा सकता है कि - जिस तरह कीमती गाड़ी के चक्के से हवा निकल जाए , मोबाइल से सीम कार्ड निकाल दिये जाए , घर में बिजली स्विच को ऑफ कर दिया जाए तो सभी सुख - सुविधाओं की व्यवस्था बेकार डब्बे जैसा लगेगा | उसकी उपयोगिता तभी समझ में आती है , जब हम गाड़ी में हवा डलवा दें , सिम लगा दें और स्विच ऑन कर ले तो सारी बुझी सुविधाएं हमें आसानी से हर वक्त मिल सकती है | ठीक उसी तरह हीं इंसान के ढांचे में , आत्मविश्वास भरना जरुरी है | तभी इंसान में निखार , चमक औए चंचलता पैदा होगा और इतना लाने के लिए इंसान को स्वयं हीं कदम आगे बढ़ाना होगा | तभी उनका आने वाला कल पूर्णरूपेण उज्जवल , प्रकाशमय बन सकेगा | यूँ तो आत्मविश्वास स्वयं चलकर किसी के पास आता नहीं | शायद हीं कोई बड़े खुशनशीब होते है , जिन्हें ईश्वरीय कृपा हासिल होता है |
आत्मविश्वास को अपने अन्दर पैदा करने या भरने का सबसे आसान व सरल उपाय है कि - किसी को अपनी प्रेरणा बना लें | प्रेरणा यानि विचार , संकेत , मन में उत्पन्न भाव को गले लगाकर अडिग होते हुए स्वयं को उसमे ढाले | विश्व की बात न कर , सिर्फ हम अपने भारत की हीं बात करे , तो इस धरती पर अद्भुत सपूतों ने जन्म लिया है , वह महिला हो या पुरुष | उन्होंने एक निर्धारित , मजबूत , असंभव लक्ष्य हासिल किया है |
फोटो डेली हंट के सौजन्य से
गौर करने की बात है कि - अंग्रेजों ने हमारे भारत पर सालों - साल हुकूमत चलाया | भारत हुकुम का गुलाम बना रहा , जुर्म होता रहा , जुर्म सहते रहे | लेकिन ज्योहिं हमारे भारतियों ने अपने अन्दर आत्मविश्वास पैदा कर , उन्हें भारत छोड़ने पर मजबूर किया , तो उन्हें वीरता हासिल हुई | वे विजयी हुए और वे बादशाह बन गए |
जो पूर्ण रूप से कमजोर है , उन्हें हीं लोग दबाकर , यह कह पड़ते है - यह कार्य तुमसे नहीं होगा , कदापि न होगा | ऐसे में व्यक्ति को टूटना नहीं चाहिए , बल्कि उस चुनौती को सहजता पूर्वक स्वीकार करके जीत हासिल करने का कठोर मंत्र यानी अपने मन और हौसले को मजबूत कर आगे बढ़ना चाहिए या फिर जिस कार्य के लिए चुनौती स्वीकार की गई है , उसके साथ कदम से कदम आगे बढ़ानी चाहिए |
आत्मविश्वास को घमंड के तराजू पर नहीं तौलना चाहिए | एक तरफ आत्मविश्वास और दूसरी तरफ घमंड बैठा हो , तो निश्चित हीं जीत घमंड की होगी | इसलिए की बुराई , अच्छाई से पहले जीतती है | इसलिए कि सच और झूठ में बहुत फर्क होता है | सच यानी मजबूत कड़ी , इरादा | जूठ यानी एक के बाद एक बातों का पेवन डालना | लेकिन तब भी झूठ सामने आकर खड़ा हो जाता है और सच को छलनी कर मात दे डालता है | छनिक हीं सही , लेकिन वह छन बहुत घातक व पीड़ादायक होता है |
जीत का सेहरा अगर बांधना हो , लक्ष्य हासिल करना हो , बुलंदियों पर पहुँचना हो तो प्रतिदिन चिंता नहीं चिंतन करे और ध्यान में स्वयं को लीन करके अपने आत्मा में बसे बैठे परमात्मा से रूबरू होकर विश्वास का अमृत अंजुरी में भरना शुरू कर दें | पुनः आपको , आपरुपी ताकत , शक्ति का जीवन संजीवनी प्राप्त हो जाएगा और आप ध्यान में हीं आसमान में स्वयं को विचरते हुए पायेंगे और यह सच साबित हो जाएगा |
आत्मा में परमात्मा को देखने से , लक्ष्य हासिल होना कठिन नहीं | फिर तो आप जैसा सोंचेंगे वैसा हीं पायेंगे , प्राप्त करेंगे , यहीं सत्य है और सत्य का दर्शन करने के लिए पुनः आपको आत्मविश्वास को आगे लाना होगा | आत्मविश्वास के बिना कुछ भी संभव नहीं है | आत्मविश्वास एक सौन्दर्य . एश्वर्य है , जिसके बिना इंसान पूर्ण नहीं | .... ( अध्यात्म फीचर :- रुपेश आदित्या )
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