पति की मृत्यु के बाद पत्नी का सदमे से निधन , एकबार फिर लोगो को सोंचने पर मजबूर किया | Bhavyashri News
- by Admin (News)
- Dec 27, 2021
सात फेरो से बंधा जन्मो का ये बंधन कभी - कभी मृत्यु की सैया पर भी एक साथ सफ़र कर जाते है और इनके नाम एक नया इतिहास लिख दी जाती है | ऐसा नहीं की यह पहली बार हुआ है और न आखिरी होने का नाम इसे दे सकते है |
हम बात कर रहे है है देवथला के ब्राहमण मुहल्ले के रहने वाले सीताराम शर्मा की , जिनकी उम्र 85 साल थी | बीते रविवार की सुबह उनकी तबियत खराब हुई और वह स्वर्ग सिधार गए | ठीक 20 मिनट बाद उनकी पत्नी भवंरी देवी को अपने पति की जुदाई का सदमा लगा और यह सदमा मृत्यु की आगोश में समां गया | इनकी उम्र 83 साल थी |
पति - पत्नी के बीच अटूट प्रेम का रिश्ता पनपते हुए लोगो ने अपनी आँखों से देखा था और मिशाल के तौर पर इनके नाम की चर्चा भी लोगो की जुबान पर आते देर नहीं लगाती है | रविवार को दोनों की मृत्यु से पूरा गाँव गमगीन हो गया |
60 साल पहले दोनों परिणय सूत्र में बंधे थे , साथ जीने और मरने की कसमें खाई थी | दोनों ने इस वादे को निभाया | बहुत कम लोग ऐसे भाग्य लेकर इस जमीन पर पैदा होते है , जो दम्पति एक साथ दुनियां को अलविदा कहकर किसी और दुनिया में सफ़र करते है |
60 साल के अटूट प्रेम के रिश्ते की अर्थियाँ एक साथ उठी और राम के नाम को सत्य मानते हुए अंतिम संस्कार तक दामन थामे रही | माहौल गमगीन बना परन्तु एक सुहागन अपने सुहाग के साथ अमर हो गई |
इनके चार बेटे और दो बेटियां है , जिनमे दो बेटे की शादी नहीं हुई है | सीताराम की पत्नी भवंरी देवी इटावा भोपजी के पास गोठवालो की ढाणी की रहने वाली थी | शादी के बाद दोनों हीं एक दूसरे का काफी ध्यान रखा करते थे | आरंभिक दौर में सीताराम शर्मा टाटानगर में काम करते थे , परन्तु वृद्धाअवस्था के बाद उनका गाँव की तरफ वापसी हुआ |
"जीये तो जीये कैसे बिन आपके , लगता नहीं
दिल कहीं बिन आपके" लिखने वाले ने खूब लिखा और साथ जियेंगे साथ मरेंगे वाली
कहावत सार्थक हुई | मगर हर दम्पति का सौभाग्य ऐसा कहाँ जो एक साथ सफ़र कर
जाए ! ऐसा लगता है मानो ये रिश्ता सात जन्मो का बंधन हो और साथ जियेंगे साथ
मरेंगे , ये उक्ति पर प्यार का मुहर लगा दिया गया हो | खैर ..... जीना
इसी का नाम है | ........ ( न्यूज़ / फीचर :- आदित्या , एम० नूपुर की कलम
से )

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